बालाघाट में वैनगंगा नदी पर बन रहे जागपुर घाट पुल का काम चर्चा में है। इस पुल का काम बहुत धीरे चल रहा था, जिसकी वजह से ठेकेदार (मेसर्स अम्फा इंफ्रास्ट्रक्चर) का टेंडर रद्द कर दिया गया था। लेकिन अब खबर आई है कि लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने उसी पुराने ठेकेदार को दोबारा काम शुरू करने की इजाजत दे दी है। करीब साढ़े 19 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस पुल का काम पिछले दो सालों से चल रहा है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने समय में सिर्फ कुछ अधूरे पिलर (खंभे) ही खड़े हो पाए हैं। काम की इस सुस्त रफ्तार की वजह से शहर के लोगों को आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है और ऐसा लग रहा है कि यह पुल समय पर तैयार नहीं हो पाएगा। जून 2026 तक काम पूरा करने की चुनौती हाल ही में कलेक्टर ने सख्त निर्देश दिए थे कि यह पुल हर हाल में जून 2026 तक पूरा हो जाना चाहिए। पहले जबलपुर के इंजीनियरों ने देरी की वजह से ठेकेदार का एग्रीमेंट खत्म कर दिया था, लेकिन ठेकेदार की अपील पर विभाग ने जुर्माने की शर्त के साथ उसे फिर से काम सौंप दिया है। अब ठेकेदार को जून 2026 तक का समय दिया गया है। विभाग की नरमी पर उठ रहे सवाल काम की कछुआ चाल को देखते हुए लोग विभाग के इस फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। जब ठेकेदार ने दो साल में सिर्फ पिलर ही खड़े किए हैं, तो वह बाकी का इतना बड़ा काम अगले डेढ़ साल में कैसे पूरा करेगा? लोग हैरान हैं कि पहले टेंडर रद्द करने की बात कही गई थी, तो फिर अचानक उसी पुराने ठेकेदार पर दोबारा मेहरबानी क्यों दिखाई जा रही है।


