जलदाय विभाग में ब्यूरोक्रेट व टेक्नोक्रेट में टकराव के हालात हो गए है। विभाग में इंजीनियरों की ताकत बढ़ाने के लिए चीफ इंजीनियर-कम-अतिरिक्त सचिव (इंजीनियरिंग इन चीफ) का नया पद सृजित किया गया, लेकिन विभाग अतिरिक्त सचिव को फाइनेंस कमेटी (एफसी) की बैठक शामिल होने पर पाबंदी लगा दी। पहले इन्हें एफसी में विशेष आमंत्रित सदस्य बनाया गया था, लेकिन 15 दिन बाद ही पूर्व आदेश पर रोक लगा दी गई। बोर्ड सचिव की ओर से जारी आदेश में लिखा गया है कि इसको लेकर जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी व प्रमुख सचिव भास्कर ए. सावंत से स्वीकृति ली गई है। वर्तमान में विभाग में चीफ इंजीनियर-कम-अतिरिक्त सचिव संदीप शर्मा है। बोर्ड के सचिव ललित करोल का कहना है कि सक्षम स्तर से अनुमोदन के बाद ही आदेश जारी किया है। कमेटी के फैसलों पर हो चुके हैं विवाद
कमेटी के फैसलों को लेकर पहले भी विवाद हो चुके है। पिछले सालों में कई बड़ी कंपनियों के पेयजल योजना व प्रोजेक्ट में देरी के बाद भी करोड़ों रुपए की पेनल्टी माफ कर दी गई। इसको लेकर शिकायतें भी हुई, लेकिन इनकी जांच नहीं हुई। फैसले से ब्यूरोक्रेसी की ताकत होगी कम
फाइनेंस कमेटी की बैठक की अध्यक्षता विभाग के प्रमुख सचिव करते है। पहली बार अतिरिक्त सचिव का पद बनने से ब्यूरोक्रेसी के एक धड़े में नाराजगी है। प्रमुख सचिव भास्कर ए. सावंत और जेजेएम एमडी कमर उल जमान चौधरी हैं। अतिरिक्त सचिव के टेक्निकल मामलों के जानकार होने की वजह से एफसी की कमान इन्हें देने के लिए भी लॉबिंग हो रही है। पूर्व चीफ इंजीनियरों का कहना है कि फाइनेंस कमेटी में अधिकांश तकनीकी मामले होते है, ऐसे में अंतिम राय अतिरिक्त सचिव की रखी जानी चाहिए। एफसी में होते हैं बड़े फैसले
एफसी की बैठकों में ही टेंडर व वर्कऑर्डर को लेकर निर्णय होते है। इसके साथ ही ठेकेदारों पर पेनल्टी लगाने व छूट देने के फैसले भी इसी कमेटी में होते है। इसके साथ ही टेंडर लेने वाली फर्म की योग्यता, तकनीकी अनुभव प्रमाण पत्र सहित अन्य मामलों को लेकर भी एफसी ही अंतिम निर्णय लेती है।


