जेल की सुरक्षा के लिए लोहे के टॉवर पर चढ़कर ड्यूटी करने वाले आरएसी के जवान खुद असुरक्षित और जरूरी सुविधाओं से वंचित हैं। 4-5 डिग्री की सर्दी, 45-50 डिग्री की गर्मी और बरसात के मौसम की मार 24 घंटे इन जवानों को सहनी ही होती है। पिछले दिनों एडीजी जेल के बीकानेर आगमन पर उनके समक्ष यह मुद्दा उठा था। बीछवाल स्थित बीकानेर केन्द्रीय कारागृह की बाहरी सुरक्षा के लिए आरएसी की कंपनी तैनात है। जेल भवन के चारों ओर लोहे के छह टॉवर बने हैं जहां आरएसी के जवान आठ-आठ घंटे की तीन शिफ्ट में ड्यूटी करते हैं। प्रत्येक टॉवर पर एक जवान की ड्यूटी होती है जो करीब 30 फिट से ज्यादा ऊंचे टॉवर से जेल की सुरक्षा के लिए निगरानी करते हैं। इनमें महिला जवान की भी टॉवर पर ड्यूटी लगती है। जेल सुरक्षा में लगे इन जवानों के लिए टॉवर पर सर्दी, गर्मी, बारिश से बचने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। लोहे के टॉवर होने के कारण करंट आने का भी खतरा बना रहता है। यहां तक कि टाॅवर पर ड्यूटी करने वाली महिला जवानों के लिए वॉशरूम का भी इंतजाम नहीं है। आरएसी के जवानों ने इस सबंध में आरएसी के जवानों ने जेल प्रशासन को बार-बार अवगत कराया, लेकिन समाधान नहीं निकला। पिछले दिनों एडीजी जेल रूपिन्दर सिंघ के बीकानेर आगमन पर उनके समक्ष भी यह मुद्दा उठा था। दरअसल केन्द्रीय कारागृह के पास ही आर्मी एरिया है और वहां सेना के जवानों के लिए ऊंचाई से निगरानी रखने के लिए सीमेंट के टॉवर बने हैं जहां उनके लिए सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं का इंतजाम भी है। जेल सुरक्षा में लगे आरएसी के जवान अधिकारियों के समक्ष सीमेंट के टॉवर बनाने और आंधी, बारिश से बचने, महिला जवानों के लिए वॉशरूम का इंतजाम करने की आवश्यकता जताते रहे हैं। “टॉवर पर ड्यूटी करने वाले आरएसी के जवानों के लिए सर्दी, गर्मी, बारिश से बचने और वॉशरूम का इंतजाम करने की योजना है। इसके लिए पीडब्ल्यूडी से एस्टीमेट बनवाकर जेल मुख्यालय से बजट मांगेंगे।”
-सुमन मालीवाल, जेल अधीक्षक


