भास्कर संवाददाता | बाड़मेर मेडिकल कॉलेज की 100 बीघा जमीन पर बनने वाले 500 बेड के सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल का काम अधूरा है। 191.50 करोड़ की लागत से बनने वाले हॉस्पिटल का कार्य सितंबर 2023 तक पूरा होना था, जबकि 16 माह ज्यादा बीत जाने के बाद 75 फीसदी काम पूरा नहीं हुआहै। निर्माण एजेंसी की लापरवाही के चलते क्वालिटी को लेकर भी अब सवाल उठने लगे है। जंग लगे सरिए और पुराने डक इस्तेमाल किए जा रहे है। जिला कलेक्टर, जनप्रतिनिधि या संबंधित विभाग के अधिकारियों की ओर से आज दिन तक क्वालिटी को लेकर निरीक्षण तक नहीं किया गया। मेडिकल कॉलेज के इस सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल के कार्यो की गुणवत्ता भी घटिया क्वालिटी की है। पुराने जंग लगे सरिए व कूलिंग सिस्टम के लिए पुराने कबाड़ से लाए डक उपयोग में लिए जा रहे है। हॉस्पिटल के निर्माणाधीन कार्यो की गुणवत्ता पर भी कॉलेज प्रशासन व आरएसआरडीसी की ओर से ध्यान नहीं दिया जा रहा है। हॉस्पिटल निर्माण की वित्तीय स्वीकृति 6 अक्टूबर 2021 को मिली थी। पूर्व सीएम अशोक गहलोत की ओर से इसका वर्चुअल शिलान्यास 20 जनवरी 2022 को किया गया। 11 जनवरी को 2022 से हॉस्पिटल निर्माण का शुरू हुआ, कार्य अब तक पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में अब तक हॉस्पिटल की बिल्डिंग का ढांचा ही खड़ा किया गया है। वहीं दूसरी ओर से नर्सिंग बीएससी कॉलेज की स्थिति भी जस की तस बनी हुई है। 14.74 करोड़ रुपए लागत से बनने वाले कॉलेज का कार्य 6 सितंबर 2022 को शुरू किया गया, इसे 5 दिसंबर 2023 तक बनाना था। कार्यकारी एजेंसी की ओर से अब तक कॉलेज का ढांचा ही खड़ा किया गया है। गर्ल्स व बॉयज हॉस्टल्स की नींव ही भरी गई है। अधिकारियों का कहना है कि बजट के अभाव में यह पूरा नहीं हो पाया। इसे मार्च 2025 तक पूरा कर दिया जाएगा। 16 महीने पहले बन कर तैयार होने वाला हॉस्पिटल अब भी अधूरा है। नर्सिंग कॉलेज फिलहाल अस्पताल परिसर स्थित जीएनएमटीसी में संचालित हो रहा है। यहां स्टूडेंट्स के लिए कक्षा कक्ष भी नहीं है। ऐसे में नर्सिंग ट्यूटर्स की ओर से एक दिन के अंतराल में जीएनएमटीसी व नर्सिंग बीएससी की कक्षाएं संचालित की जा रही है। वहीं दूसरी ओर 250 बेड के स्वीकृत जिला अस्पताल में 500 बेड संचालित किए जा रहे है। शिशुरोगी हो या प्रसूताएं उन्हें बेड तक नसीब नहीं हो रहा है। दूसरी ओर सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल समय पर पूरा नहीं होने से मरीजों को परेशानी हो रही है। ^हॉस्पिटल का 90% तथा नर्सिंग बीएससी कॉलेज का 70% कार्य हुआ है। मार्च 2025 तक हेंड ओवर कर दिए जाएंगे। हॉस्पिटल का फिनिशिंग कार्य शेष है। सरिए जंग लगे उपयोग में नहीं लिए जा सकते, अगर सरिए में जंग लग जाता है तो उसका जिंक ऑक्साइड का ट्रीटमेंट कर उपभोग में लिए जाते है। डक पुराने नहीं बनाए गए है। कार्य के दौरान इन पर डस्ट लग गई होगी। कार्य में देरी हाई टेंशन बिजली लाइनों की शिफ्टिंग व बजट के समय पर नहीं आने से हुई। – सौरभ जैन, पीडी आरएसआरडीसी। भास्कर टीम ने निर्माण कार्यो का जायजा लिया तो जी प्लस फोर बिल्डिंग का बाहर से ढांचा तैयार है। बिल्डिंग के बाहर पाइप लाइन निकालने के लिए दीवार बनाई जा रही है। वहीं अंदर निर्माणाधीन कार्यो के लिए जंग लगे सरिए उपयोग में लिए जा रहे है। जंग लगे सरिए के ढेर लगे हुए है। बिना सेफ्टी के मजदूर चार मंजिला इमारत में कार्य करते नजर आए। बिल्डिंग में कूलिंग सिस्टम के लिए डक सिस्टम लगाया जा रहा है। ठेकेदार की ओर से डक भी कबाड़ या पुरानी बिल्डिंग से उतारकर लाए है। इन्हीं कबाड़ के डक सिस्टम से जुगाड़ कर कूलिंग सिस्टम तैयार होगा। जंग लगे सरिए से बनी निर्माणाधीन बिल्डिंग की मॉनिटरिंग नहीं हो रही है।


