प्रतापगढ़ कलेक्टर अंजलि राजोरिया के निर्देश पर राजस्व विभाग की टीम ने धमोतर दरवाजे से गलजी कुएं तक नाले की नपती की। इस दौरान सामने आया कि सरकारी रिकॉर्ड में 60 फीट दर्ज नाले की चौड़ाई मौके पर घटकर 25 से 30 फीट रह गई है। राजस्व विभाग के तीन गिरदावर और चार पटवारियों की संयुक्त टीम ने पूरे क्षेत्र की माप की। जांच में सामने आया कि नाले पर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण और अवैध निर्माण किया गया है। कहीं दुकानें नाले की सीमा में बनी हैं, तो कहीं मकानों ने नाले की जगह घेर ली है। लगभग छह माह पूर्व नगर परिषद ने नाले के समीप स्थित 1900 वर्ग फीट भूमि को ई-ऑक्शन के माध्यम से 4 करोड़ 92 लाख 10 हजार रुपए में नीलाम किया था। इस नीलामी प्रक्रिया में भी गंभीर अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला कलेक्टर अंजलि राजोरिया ने प्रतापगढ़ तहसीलदार को प्रकरण पीएलपीसी में दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। नपती के दौरान टीम को भारी गंदगी और तेज दुर्गंध का सामना करना पड़ा। नाले के आसपास फैली गंदगी ने नगर परिषद की सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों की मानें तो नाले की चौड़ाई कम होने से आने वाले मानसून में जलभराव की समस्या गंभीर हो सकती है, जिसका सीधा असर आमजन के स्वास्थ्य और यातायात पर पड़ेगा। इस कार्रवाई के दौरान नगर परिषद आयुक्त जितेंद्र मीणा, जेईएन दुलीचंद सोलंकी सहित नगर परिषद की टीम उपस्थित रही। राजस्व विभाग की ओर से गिरदावर प्रभुलाल मीणा, चेतन मीणा, घनश्याम टेलर तथा पटवारी अर्जुन, अर्पित मीणा, भूपेंद्र सिंह और दीपिका जोशी ने नपती की।


