मंदसौर जिला प्रशासन ने ग्राम अलविदा खेड़ी में सर्वे नंबर 561 पर स्थित ईंट भट्टों के अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की है। इस प्रशासनिक कार्रवाई के विरोध में ईंट भट्टा संचालकों ने शहर के गांधी चौराहे पर प्रदर्शन कर अपना आक्रोश जताया। इसके बाद अखिल भारतीय कुंभकार महासंघ के राष्ट्रीय महासचिव मनोज प्रजापति ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखीं। मनोज प्रजापति ने बताया कि मंदसौर तहसील और जिले की उक्त भूमि पर लगभग 50 वर्षों से ईंट निर्माण का कार्य किया जा रहा है, जिससे सैकड़ों परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। भट्टा संचालकों का कहना है कि उन्हें मध्य प्रदेश शासन के खनिज विभाग एवं राजस्व विभाग के आदेशों (1997 एवं 2006) के तहत पट्टा प्रदान किया गया था और वे नियमानुसार वर्षों से शांतिपूर्ण ढंग से अपना व्यवसाय कर रहे थे। आरोप- जलते ईंट भट्टों पर पानी डलवाया
उन्होंने आरोप लगाया कि 21 दिसंबर 2025 (संभवतः 2023 या 2024) को एसडीएम एवं तहसीलदार द्वारा बिना किसी पूर्व सूचना के मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की गई। इस दौरान जलते हुए ईंट भट्टों में पानी डलवाया गया, भट्टों को ध्वस्त किया गया तथा कच्ची ईंटों को जेसीबी मशीन से कुचल दिया गया। इस कार्रवाई से प्रत्येक भट्टा संचालक को लगभग 15-15 लाख रुपए का नुकसान हुआ है। ईंट निर्माण ही इन परिवारों की आजीविका का एकमात्र साधन है, ऐसे में अचानक की गई इस कार्रवाई से उनका जीवन संकट में आ गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि एसटीपी प्लांट के लिए आवश्यक भूमि पूर्व में ही 7 भट्टा संचालकों द्वारा खाली कर शासन को सौंप दी गई थी। इसके बावजूद, शेष भट्टा संचालकों को बिना सूचना दिए कार्रवाई की गई। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान मजदूरों के रहने के कमरे, पानी के टैंक और कुएं भी तोड़ दिए गए, जिससे मजदूरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।


