कॉपी के पन्नों की पतंग उड़ाते थे एक्टर इरफान:खाचरियावास बोले-कटी पतंग के लिए कुत्ते के ऊपर कूद गया था; पढ़ें पतंगबाजी के किस्से

जयपुर की पतंगबाजी सबसे खास है। ये त्यौहार सिर्फ 14 जनवरी तक सीमित नहीं है। जयपुर के लोग आज भी मकर संक्रांति से कई दिन पहले छतों पर पतंग उड़ाते नजर आते हैं। जयपुर में पतंगबाजी का क्रेज ऐसा है कि बाहर रहने वाले सेलेब्रिटी भी इस दिन शहर पहुंचते हैं। पतंगबाजी का आनंद लेते हैं। दैनिक भास्कर ने जयपुर के ऐसे ही कुछ नेताओं और स्टार्स के परिवार से बात की। इस दौरान दिवंगत बॉलीवुड एक्टर इरफान खान के भाई ने बताया कि उन्हें पतंगबाजी का इतना शौक था कि कॉपी के पन्ने से पतंग बनाकर चलते तांगे के पीछे बैठकर उड़ाते थे। वहीं, कांग्रेस विधायक प्रताप सिंह खाचरियावास ने भी पतंग लूटने का एक किस्सा बताया। आगे पढ़िए पतंगबाजी के किस्से… इरफान खान, बॉलीवुड एक्टर : स्कूल से घर लौटने से पहले तैयार कर लेते थे पतंग
बॉलीवुड स्टार इरफान खान अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उनके पतंगबाजी के शौक के बार में सभी जानते हैं। जयपुर के रामगढ़ मोड़ पर स्थित घर पर इरफान ने खूब पतंगबाजी की है। इरफान खान के भाई इमरान ने बताया- इरफान खान को पतंगबाजी का शौक बचपन से था। स्कूल टाइम से ही पतंगबाजी के शौकीन रहे हैं। उन्होंने बताया- उस दौर में हम सेंटपॉल स्कूल में पढ़ते थे। हमारा घर चार दरवाजा और आमेर रोड के बीच में हुआ करता था। तांगे में बैठकर स्कूल से घर आते थे। पतंगबाजी का शौक इस हद तक था कि तांगे में इरफान खुद ही कागज और लकड़ी की डंडी से पतंग बनाया करते थे। इरफान और हम कॉपी के कागज को फाड़कर उसे फोल्ड करके एक बॉक्स का आकार बनाते थे। उसमें डोर बांधते थे। जब तांगा चलता था तो उसकी हवा के कारण पतंग के रूप में उड़ती थी। चलती जीप से पतंग उड़ाया करते थे
उन्होंने बताया- इरफान और हम पिता के साथ टोंक या कहीं भी जाते थे तो पतंगबाजी के शौक को पूरा करते थे। उस दौर में पिता के साथ जीप में जाया करते थे। चलती जीप में पतंग उड़ाते थे। जीप तेज चलती थी। इससे वह पतंग किसी पेड़ में अटक कर कट जाती थी। वह एक अलग ही तरह का एंजॉय हुआ करता था। इमरान ने बताया- इरफान खान ने कभी भी पतंगबाजी को हार जीत का खेल नहीं समझा। उसे एंजॉय करने का माध्यम ही माना। वह एंजॉय इस तरीके से करते थे की पतंग लंबी है, लड़ा दी। कट गई तो उसे वापस लपेट लिया। इरफान पतंगबाजी में कटी हुई पतंग को लपेटकर लाने में काफी खुश रहते थे। इरफान ने शाम के वक्त पतंग कभी नहीं उड़ाई
उन्होंने बताया- इरफान ने पतंगबाजी के नाम पर किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया। मां की सख्त हिदायत थी कि शाम के वक्त पतंग नहीं उड़ानी। इसका कारण था की पतंग डोर से कोई पक्षी उलझ जाएगा। उसे कट लग जाएगा। इरफान ने उम्र भर इस बात को फॉलो किया। इरफान खान शाम के समय अपनी पतंग को उतार लिया करते थे। इमरान ने बताया- मकर संक्रांति से एक दिन पहले ही पतंग और डोर बाजार से दिलाई जाती थी। इससे पहले हमें पतंग डोर नहीं दिलाई जाती थी। उस दौरान पतंग वालों का मोहल्ला और हल्दियों के रास्ते में हमारी दुकान हुआ करती थी। उसके पास एक बरेली वाले की दुकान होती थी, जो मकर संक्रांति के दिनों में ही आया करता था। उससे हम तीनों भाई पिता के साथ पतंग और डोर लाया करते थे। इमरान ने बताया- हमारे पिता कभी खड़े होकर के पतंगबाजी नहीं करते थे। वह बैठकर ही पतंग उड़ाया करते थे। वे बैठकर ही पतंग को काटा करते थे। उनके पतंग लड़ाने का अंदाज खेंच से पतंग लड़ाने का रहा था। उन्होंने कभी भी शय और ढील से पतंग नहीं लड़ाई। इरफान की गाड़ी में पतंगबाजी का सामान हमेशा रहता था
इमरान ने इरफान से ही जुड़े किस्से को साझा करते हुए बताया- पतंगबाजी और क्रिकेट इरफान खान की जिंदगी का खास हिस्सा था। उनकी गाड़ी में 365 दिन चार चीज रहना लाजमी थी। ‌ पतंग, डोर, बॉल और बैट। जहां भी मौका मिला और खुला मैदान मिला। वह अपनी टीम के साथ क्रिकेट खेलने लग जाते थे या स्टाफ के साथ ही पतंग उड़ाया करते थे। उन्होंने बताया कि इरफान को पतंगबाजी का कितना शौक था कि मुंबई में भी अपनी बालकनी से पतंग को लंबी कर लिया करते थे। इरफान खान पतंग काटने के बाद कभी भी शोर गुल करने के अंदाज में नहीं रहते थे। बल्कि अपने ही अंदाज में कहते थे- चलो हटो। प्रतापसिंह खाचरियावास, पॉलिटिशियन : कटी पतंग के लिए कुत्ते के ऊपर कूद गया
कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने बताया- मैं पतंगबाजी का बहुत बड़ा शौकिन रहा हूं। जिस घर में अभी रहता हूं, यहां पर पतंगबाजी करता हूं। उन्होंने बताया- एक दौर ऐसा भी था, जब मकर संक्रांति से पहले रात बड़ी लगती थी। तब इंतजार रहता था, रात पूरी हो जाए तो सुबह सबसे पहले पतंगबाजी करूं। उन्होंने अपने बचपन के एक किस्से को साझा करते हुए बताया- जब मैं छोटा था, तब एक पतंग कट कर आई थी। जो खाली मकान में पड़ी थी। मैं साइकिल से घर आया था। मैं दीवार कूद कर जैसे ही प्लाट में पहुंचा तो वहां बैठे कुत्ते ने मेरे पेर पर काट लिया, क्योंकि मैं उस पर ही कूद गया था। पिता से पतंग के लिए कहा तो घर में घुसे बिना बाजार ले गए
उन्होंने बताया- पतंगबाजी का इतना शौक था कि एक बार मेरे पिताजी लेट घर आए। मेरी मां ने उनसे कहा कि यह तो आपका इतने समय से इंतजार कर रहा है। आपको इसके लिए पतंग डोर लानी थी। मैं बहुत छोटा था। मेरे पिता घर में भी नहीं घुसे और तुरंत मुझे स्कूटर पर बैठाया। मुझे बाजार लेकर गए। पतंग, मांझे की चरकी और सद्दा की चरकी दिलाकर लाए। बड़े पतंगबाजों की नकल करने लगा था
उन्होंने बताया- जब मैं थोड़ा बड़ा होने लगा तो मैं बड़े पतंगबाजों की नकल करने लगा और लंबी पतंग लड़ाने लगा। एक पतंग से 25 से ज्यादा पेंच काट देना बहुत बड़ी बात है। एक बार लंबी निकलने के बाद पतंग जो बीच में आती उसका ही सफाया करते जाते। पतंग जब लंबी लड़ती है तो जो आजू-बाजू आ गया वो ही गया। पतंग लड़ाना और पतंग के पेंच काटना और उसके बाद मजे करना, अलग ही बात थी। भाई ने पतंग की डोर काट दी तो कहा- आपने पाप कर दिया
उन्होंने अपने बड़े भाई करण सिंह का किस्सा साझा करते हुए बताया- बड़े भाई ने एक बार जबरदस्त काम कर दिया। वो पतंग नहीं उड़ाते थे। वो छत पर आए तब मेरी लंबी पतंग लड़ रही थी, कितने ही पेंच हमने काट दिए थे। उन्होंने चुपचाप पतंग की डोर तोड़ दी। फिर साइड में हो गए। मुझे बहुत गुस्सा आया। मैंने कहा आपने बहुत पाप कर दिया। वो पतंग इतनी लंबी लड़ रही थी। उस पतंग की डोर हाथों से निकल गई। कृष्णा नागर, पैरालिंपिक गोल्ड मेडलिस्ट : कई बार छत से गिरते हुए बचा
टोक्यो पैरालिंपिक में गोल्ड मेडल जीतने वाले जयपुर के बैडमिंटन खिलाड़ी कृष्णा नागर ने बताया- मकर संक्रांति मेरा पसंदीदा त्योहार है। इस फेस्टिवल को मैं अपने दोस्तों के साथ मनाता हूं। मकर संक्रांति पर मेरा ज्यादा समय दोस्तों के ही बीच गुजरता है। अब मकर संक्रांति पर तीन-चार दिन ही पतंगबाजी कर पाते हैं। पहले एक दौर में मकर संक्रांति से पहले दो महीने पहले ही पतंगबाजी शुरू कर देते थे। उन्होंने बताया- मेरी नानी जयपुर की चारदीवारी में रहती हैं। कुछ सालों पहले तक हर बार पतंगबाजी चारदीवारी से ही किया करता था। वहां बहुत पतंग उड़ती हैं। पतंग उड़ाते वक्त इतना खो जाता था कि छत के जाले से कई बार गिरते-गिरते बचा हूं। यदि उस समय हादसा होता तो मैं सीधे दो से तीन मंजिला मकान से नीचे गिरता। एक बार तो जाले में मेरा पांव ही फंस गया था। उन्होंने बताया- जयपुर में मुझे चारदीवारी से पतंग उड़ाना काफी पसंद है। वहां सबसे ज्यादा पतंगबाजी होती है। मेरी नानी पहले चारदीवारी में नाहरगढ़ के पास रहती थीं। तब मैं ज्यादातर पतंगबाजी वहीं से करता था। हमारा प्रताप नगर में घर है। वहां से भी काफी पतंगबाजी की है। यहां अब पहले की तरह इतनी पतंगबाजी नहीं होती। अभी की जनरेशन को पतंगबाजी का इतना शौक नहीं है। पतंगबाजी का उतना क्रेज नहीं, जितना पहले हुआ करता था। समय के साथ बहुत बदलाव आ गया है। लोगों को धूप में रहना पसंद नहीं है। पहले लोग कड़ी धूप में भी पतंगबाजी किया करते थे। भाभी जी घर पर हैं फेम वैभव माथुर : पतंग लूटने बुलाते थे पड़ोसी
फेमस टीवी सीरियल भाभी जी घर पर हैं के किरदार टीका (वैभव माथुर) का बचपन जयपुर की चारदिवारी में ही किराए के मकान में गुजरा है। वैभव ने बताया- 8 साल की उम्र में किराए के घर की छत एक मंजिला थी। ऐसे में पड़ोसियों की छत से ही पतंग उड़ाते थे। मेरे स्वभाव के कारण पड़ोसी भी अपनी छत पर पतंग उड़ाने के लिए बुलाया करते थे। उन्होंने बताया- स्कूल से लेकर कॉलेज तक पतंगबाजी का शौक बरकरार रहा। सुबह से शाम तक जयपुर की चारदीवारी में पतंगबाजी किया करते थे। पतंग लूटने का भी काफी शौक था। पूरे मोहल्ले में पड़ोसियों की छत पर कटकर आई पतंग को लूटा करते थे। पड़ोसी भी पतंग लूटने के लिए मुझे ही आवाज लगते थे। पतंग कटते ही कहते थे- विक्की पतंग कट गई, इसे लूटना है। वैभव ने बताया- जब मैं पतंग उड़ाया करता था तो किसी अन्य को उस छत से पतंग लंबी नहीं करने देता था। पतंग कटने के बाद ही उनके भाई अपनी पतंग लंबी करते थे। उन्होंने बताया- उन्हें खेंच से पतंग लड़ाना काफी पसंद था। जब वह पतंग की खेंच मारा करते थे। वैभव माथुर ने बताया- अब मकर संक्रांति पर जयपुर नहीं आ पाते। इसका उन्हें काफी मलाल रहता है। मकर संक्रांति के समय पतंग उड़ाते समय तिल और गुड़ से बने लड्डू खाना काफी पसंद था। कालीचरण सराफ : भाजपा विधायक भी पतंगबाजी के शौकीन
जयपुर के मालवीय नगर से विधायक कालीचरण सराफ भी पतंगबाजी का शौक रखते हैं। 73 साल की उम्र में भी कालीचरण सराफ परिवार और कार्यकर्ताओं के साथ पतंगबाजी करते हैं। उन्होंने बताया- जब मैं 5 साल का था तो पतंग उड़ाने का बड़ा मन करता था। मुझसे पतंग लंबी नहीं होती थी। परिवार के सदस्य की पतंग कोई काट देता था तो बड़ा गुस्सा आता था। 11 साल की उम्र में पतंग उड़ाना सीखी। कालीचरण सराफ ने बताया- मैं अपने दोस्तों के साथ पतंगबाजी के लिए नाहरगढ़ जाया करता था। पहले बाबा हरिशचंद्र मार्ग पर रहते थे। बाद में ब्रह्मपुरी में रहने लगे। कालीचरण सराफ कई नामचीन पतंगबाजों के साथ भी पतंग लड़ा चुके हैं। सियासी चेहरा होने के कारण अब विधायक परिवार के साथ कार्यकर्ताओं की ओर से पतंगबाजी के कार्यक्रमों में पतंग उड़ाते नजर आते हैं। …………… ये भी पढ़ें संक्रांति पर पतंगबाजी के लिए कैसी रहेगी हवा?:जयपुर एयरपोर्ट के आसपास पतंगबाजी पर रोक, सुबह-शाम दो-दो घंटे नहीं उड़ा सकेंगे पतंग जयपुर में मकर संक्रांति पर लोग जमकर पतंगबाजी का आनंद लेते हैं। जयपुर में इस बार 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर हवा पतंगबाजी के लिए अनुकूल रहेगी। हवा की स्पीड भी सामान्य (5 से 10 किलोमीटर प्रतिघंटा) रहने की संभावना है। (पूरी खबर पढ़ें)

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *