प्रतापगढ़ कलेक्टर बनाम उदयपुर सांसद:कलेक्टर ने डीएमएफटी फंड से जुड़े तथ्यों को सामने रखा, सांसद के आरोपों को बताया तथ्यहीन

कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया और उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत के बीच चल रहा टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। सांसद रावत की ओर से मुख्य सचिव को लिखे गए पत्र के बाद अब कलेक्टर डॉ. अंजलि राजोरिया ने मुख्य सचिव को विस्तृत पत्र भेजते हुए सांसद के आरोपों को तथ्यों के विपरीत बताया है। कलेक्टर ने न केवल डीएमएफटी फंड से जुड़े तथ्यों को सामने रखा, बल्कि पत्राचार की भाषा, मर्यादा और महिला अधिकारी की गरिमा से जुड़े गंभीर सवाल भी उठाए हैं। कलेक्टर ने लिखा है कि सांसद मन्नालाल रावत स्वयं एक राजकीय राजपत्रित अधिकारी रह चुके हैं और उन्हें प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी है। इसके बावजूद उन्होंने मुख्यमंत्री और अधिकारियों को तथ्यों के विपरीत पत्र व अशासकीय भाषा में पत्र प्रेषित किया। कलेक्टर ने इसे एक महिला अधिकारी की छवि धूमिल करने और मानसिक मनोबल कमजोर करने की नियत से किया गया कृत्य बताया। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और कार्मिक विभाग के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि किसी भी अधिकारी, विशेषकर महिला अधिकारी के संदर्भ में पत्राचार करते समय भाषा और मर्यादा का पालन अनिवार्य है। कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधि किसी अधिकारी के स्थानांतरण, चार्जशीट या पदस्थापन की मांग नहीं कर सकते, क्योंकि यह प्रक्रिया सीसीए और आरएसआर नियमों के तहत निर्धारित हेरारकी से ही संभव है। कलेक्टर ने यह भी उल्लेख किया कि प्रतापगढ़ जिले की कुल 8 पंचायत समितियों में से केवल धरियावद पंचायत समिति उदयपुर लोकसभा क्षेत्र में आती है, जबकि पीपलखूंट बांसवाड़ा और शेष 6 पंचायत समितियां चित्तौड़गढ़ संसदीय क्षेत्र में शामिल हैं। इसके बावजूद सांसद रावत द्वारा डीएमएफटी की अधिकांश राशि अपने क्षेत्र में उपयोग करवाने का दबाव बनाया जा रहा है, जो अनुपातिक वितरण के सिद्धांत के विरुद्ध है। सांसद रावत ने कहा- कुछ कहूंगा तो बखेड़ा खड़ा होगा
इस पूरे विवाद पर जब दैनिक भास्कर ने सांसद मन्नालाल रावत से बातचीत की तो उन्होंने कहा, मैं इस मामले में कुछ कहूंगा तो बखेड़ा खड़ा हो जाएगा। किसी के माइंड में इस तरह की बातें चलती हैं, जिसे अलोकतांत्रिक कहते हैं। जनता की मांग स्वाभाविक होती है और हर जनप्रतिनिधि का यह धर्म है कि वह विकास कार्यों के लिए आवाज उठाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे भावनात्मक मुद्दों में नहीं जाते, बल्कि सरकार में जनता के विकास के काम होने चाहिए।

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