भास्कर न्यूज | अंबिकापुर सरगुजा जिले में सरकारी विभागों के अलग-अलग बैंकों में एकाउंट हैं। इनमें से कई विभागों ने कुछ साल तक खातों का उपयोग किया और फिर लेन-देन करना भूल गए। बैंक में विभागों के ऐसे खातों की संख्या 5193 है। सालों से इनका उपयोग नहीं होने से अब ये खाते असक्रिय हो गए हैं। इनमें दो हजार से ज्यादा एकाउंट तो दस साल पुराने हैं और इनमें कोई लेन-देन नहीं हुआ है। अब ये खाते डीपाजिटर एजुकेशन एंड अवर्नेंस फंड (डीईएएफ) की श्रेणी में आ गए हैं। इन असक्रिय खातों में अब भी करीब 29 करोड़ अलग-अलग योजनाओं के जमा हैं। जिला प्रशासन ने सभी सरकारी विभागों को पत्र लिखकर 31 दिसंबर तक केवाईसी करा खातों को दोबारा सक्रिय करने का निर्देश दिया है। जिले के सरकारी विभागों के खातों में जमा रकम की जानकारी तब सामने आई, जब आरबीआई ने आप की पूंजी आप का अधिकार अभियान के तहत ऐसे खातों की जानकारी मांगी। इसको लेकर शासन ने सभी जिलों में पता करवाया और खातों की संख्या पता चली। जिला प्रशासन के पत्र के बाद विभाग अब अपने-अपने असक्रिय खातों का पता कर इन्हें सक्रिय करने की कवायद कर रहे हैं। दिक्कत यह आ रही है कि इनमें से ज्यादातर खातों के पासबुक या दस्तावेज ही नहीं मिल रहे हैं। 50 फीसदी से ज्यादा विभागों में अफसर-कर्मी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। ये होता है डीईएएफ एकाउंट डीईएएफ एकाउंट को जमाकर्ता शिक्षा व जागरूकता कोष कहा जाता है, जिसे भारतीय रिजर्व बैंक संचालित करता है। यह उन बैंक खातों या राशियों को संदर्भित करता है, जिनमें 10 साल या उससे अधिक समय से कोई लेन-देन नहीं हुआ है। इस रकम को बैंक आरबीआई के इस फंड में ट्रांसफर कर देता है, ताकि जमाकर्ताओं के हितों को सुरक्षित रखा जा सके और जरूरत पड़ने पर वे अपना पैसा ब्याज सहित वापस पा सकें। केवाईसी कराने से सक्रिय हो जाएंगे सभी एकाउंट ^सालों से लेन-देने नहीं होने के कारण ये एकाउंट असक्रिय हो गए हैं। बैंक समय-समय पर खातेदारों को जानकारी देता है, लेकिन कई बार खाताधारक ध्यान नहीं देते हैं। इससे ये बाद में डेफ श्रेणी में चले जाते हैं। खाते की राशि आरबीआई के पास जमा हो जाती है। संबंधित विभाग के वर्तमान प्रमुख के नाम से इन खातों की केवाईसी कराई जाएगी। इसके बाद ये खाते फिर सक्रिय हो जाएंगे। इसके साथ डेफ श्रेणी वाले खाते की जमा राशि आईबीआई से ब्याज सहित वापस हो जाएगी। -दीपेंद्र यादव, एलडीएम, सरगुजा


