उमरिया जिले के चंदिया स्थित मध्यप्रदेश वेयर हाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन (एमपीडब्ल्यूएलसी) के कैंप में लगभग 6 हजार क्विंटल धान पिछले तीन वर्षों से खराब पड़ा है। इसे हटाने या जिम्मेदारी तय करने के लिए अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। कैंप के चबूतरों पर रखी यह धान पूरी तरह सड़ चुकी है और काली पड़ गई है। इससे तेज बदबू आ रही है, जिससे वहां काम करने वाले कर्मचारियों और किसानों को परेशानी हो रही है। सड़ी धान के कारण चबूतरों पर जगह घिरी है, जिससे वर्तमान धान उपार्जन और नए धान के भंडारण में भी दिक्कतें आ रही हैं। खराब पड़ी इस धान की कीमत लाखों रुपए में है, जिससे शासन को आर्थिक नुकसान होने की आशंका है। तीन साल से चल रही इस लापरवाही ने वेयरहाउस प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत के बाद भी तीन साल इस मामले में एमपी वेयर हाउसिंग एंड लॉजिस्टिक्स कॉरपोरेशन की अधिकारी लक्ष्मी मरावी ने बताया कि खराब धान को हटाने के लिए उच्च कार्यालय को पत्राचार किया गया है, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि तीन वर्षों में किसी अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय नहीं की गई है और न ही कोई कार्रवाई हुई है।


