तीन मेगा प्रोजेक्ट:पूर्वी-पश्चिमी बायपास और अहिल्या पथ… इनसे इंदौर को मिलेगा विस्तार, लेकिन 10 महीने से अटके, वजह- जमीनें नहीं मिल रही

इंदौर को विस्तार देने वाले तीन मेगा प्रोजेक्ट- पूर्वी-पश्चिमी बायपास और अहिल्या पथ योजना बनने के बाद भी 10 माह से अटके पड़े हैं। दो प्रोजेक्ट एनएचएआई और एक प्रोजेक्ट आईडीए के पास है। पूर्वी-पश्चिमी बायपास की प्लानिंग और डीपीआर का काम दिसंबर 2023 से चल रहा है। पश्चिमी बायपास के लिए मार्च 2024 में टेंडर भी अहमदाबाद की कंपनी एमकेसी कंस्ट्रक्शन को दिया जा चुका है, लेकिन 10 महीने बाद भी कंपनी साइट क्लीयर होने का इंतजार कर रही है। इसी तरह 77 किमी के पूर्वी बायपास की भी डीपीआर एनएचएआई ने बनवा ली थी। फरवरी 2024 में जमीन अधिग्रहण के लिए धारा 3 ए के तहत नोटिफिकेशन भी जारी हो गया था, लेकिन फिर प्रोजेक्ट प्रदेश सरकार के हाथ चला गया। सरकार के स्तर पर 7-8 महीने से कोई कार्रवाई नहीं हुई तो अब प्रोजेक्ट वापस एनएचएआई के पाले में चला गया है। दोनों बायपास 5 चरण में बनाए जाएंगे। इनके बन जाने पर इंदौर की परिधि 141 किमी की हो जाएगी। 1339 हेक्टेयर जमीन चाहिए आउटर बायपास के लिए आउटर बायपास के लिए कुल 1339 हेक्टेयर जमीन चाहिए। 64 किमी लंबे पश्चिमी बायपास के लिए 31 गांवों की जमीन के अधिग्रहण का काम चल रहा है। इसमें पीथमपुर, हातोद, देपालपुर और सांवेर तहसील के गांव शामिल हैं। वहीं 77 किमी लंबा पूर्वी बायपास 38 गांवों से निकलना है, जिसमें 5 गांव देवास के हैं। इसके अलावा खुड़ैल, सांवेर, बिचौली हप्सी, कनाड़िया और महू तहसील के गांव हैं। 700 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। वहीं पश्चिमी बायपास के लिए 639 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। 400 करोड़ की अहिल्या पथ योजना भी कागजों में उलझी आईडीए की अहिल्या पथ योजना भी घोषित होने के बाद से ही कागजों में उलझी है। 15 किमी की सड़क के लिए 14 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है, वहीं इस प्रोजेक्ट की लागत 400 करोड़ रुपए है। ये सड़क नैनोद रिजलाय, बुढ़ानिया, बड़ा बांगड़दा, पालाखेड़ी बुढ़ानिया, पालाखेड़ी लिंबोदागारी, रेवती और बरदरी से निकालने की योजना है। पूरी सड़क नए अलाइनमेंट पर बनेगी, जिसके लिए खेतों की जमीन लेना होगी। इसी के चलते किसान भी योजना का विरोध कर रहे हैं। आउटर बायपास के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है
आउटर रिंग रोड के लिए 1300 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन की जरूरत है। अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। किसानों और जमीन मालिकों के विरोध के चलते देरी हो रही।
– सुमेश बांझल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई

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