चित्तौड़गढ़ में हेमंत बृजवासी की भजन संध्या ने बांधा समां:राधे-राधे के जयकारों से गूंज उठा स्वदेशी मेला परिसर, देर रात तक झूमी भीड़

देशभर में अपनी मधुर आवाज और भावपूर्ण भजनों के लिए पहचाने जाने वाले मशहूर भजन गायक हेमंत बृजवासी ने चित्तौड़गढ़ के स्वदेशी मेले में भक्ति की अनूठी छटा बिखेरी। बुधवार देर रात तक चली उनकी भजन संध्या ने पूरे मेले को भक्तिमय बना दिया। जैसे ही हेमंत बृजवासी मंच पर पहुंचे, वैसे ही श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। उनके एंट्री के साथ ही तालियों की गूंज सुनाई दी। बड़ी संख्या में मौजूद दर्शक शुरुआत से अंत तक उनके भजनों में डूबे रहे। स्वदेशी मेले की रात भक्ति और उल्लास में बदली पूरी चित्तौड़गढ़ में चल रहे स्वदेशी मेले का दूसरा दिन बिल्कुल अलग नजर आई। दिनभर खरीदारी और मेलों की चहल-पहल के बाद रात होते ही भजन संध्या ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया। मेले में आए लोग अपने परिवार और मित्रों के साथ मंच के सामने जमा हो गए। बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों सभी में भक्ति का उत्साह दिखाई दिया। भजनों की धुन सुनकर कई लोग झूमने लगे तो कई शांति से बैठकर भक्ति रस का आनंद लेते रहे। हेमंत बृजवासी के भजनों पर देर रात तक झूमी भीड़ हेमंत बृजवासी ने एक से बढ़कर एक प्रसिद्ध भजन गाकर श्रोताओं को बांधे रखा। “जय राधे राधे श्री राधे राधे” और “राधा रमण हरि गोविंद जय जय” जैसे भजनों से उन्होंने शुरुआत की, जिस पर पूरा पांडाल झूम उठा। इसके बाद “सांवरे सांवरे तेरे बिना लागे नहीं जिया” और “मेरे बांके बिहारी” जैसे भजनों ने माहौल को और भावुक बना दिया। “वृंदावन के बांके बिहारी, बरसाने की राधा प्यारी” और “किशोरी कुछ ऐसा इंतजाम” जैसे भजनों पर श्रद्धालु देर रात तक नाचते और गाते रहे। भक्ति गीतों से गूंज उठा पूरा पांडाल “राधा कृष्ण” नाम भजन संध्या के दौरान पूरा पांडाल राधा-कृष्ण के नाम से गूंजता रहा। चारों ओर जय श्रीकृष्ण और राधे-राधे के जयकारे सुनाई देते रहे। हेमंत बृजवासी की आवाज में भक्ति का ऐसा रंग था कि लोग खुद को रोक नहीं पाए। कई श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भजनों में खो गए। रोशनी और साउंड सिस्टम के साथ भजनों की प्रस्तुति ने माहौल को और भी खास बना दिया। स्वदेशी मेले में भजन संध्या बनी लोगों की यादगार रात स्वदेशी मेले में आयोजित यह भजन संध्या लोगों के लिए एक यादगार अनुभव बन गई। कार्यक्रम के बाद भी लोग हेमंत बृजवासी के भजनों की तारीफ करते नजर आए। आयोजकों ने बताया कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य लोगों को भारतीय संस्कृति और भक्ति से जोड़ना है। देर रात तक चले इस कार्यक्रम ने यह साबित कर दिया कि भक्ति संगीत आज भी लोगों के दिलों में खास जगह रखता है। चित्तौड़गढ़ वासियों के लिए यह रात लंबे समय तक याद रहने वाली बन गई।

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