जैन साध्वी का मण्डावा स्वागत:पदयात्रा के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में किया जा रहा अध्यात्म का प्रसार

आचार्य महाश्रमण की वरिष्ठ शिष्या साध्वी प्रिंयका, साध्वी सुक्रांति, साध्वी अंशिता प्रभा और साध्वी हर्षिता का मण्डावा की धरती पर मंगलवार को मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर कोलकाता प्रवासी शंकरलाल सुरोलिया परिवार कि ओर से उनका स्वागत कर आशीर्वाद लिया गया। साध्वी संघ का जसकरण सुरोलिया भवन में आगमन हुआ, जहां श्रावक समाज और श्रद्धालुओं ने उनका आध्यात्मिक भाव से स्वागत किया। इस अवसर पर तेरापंथ महिला मंडल की महिलाओं समेत अन्य लोग मौजूद थे। इस अवसर पर प्रवचन सभा में साध्वी प्रिंयका ने कहा कि साधु-संत समाज की धरोहर होते हैं। जन्मभूमि के प्रति प्रेम और लगाव स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि साधु-साध्वियां पदयात्रा के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में अध्यात्म का प्रसार कर धर्म जागरण का कार्य करते हैं। समाज को इसका लाभ लेना चाहिए। साध्वी मण्डावा के सुरोलिया भवन में एक दिवसीय का प्रवास किया। इस दौरान विभिन्न आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। साध्वी प्रिंयका ने कहा कि अहिंसा का सामान्य अर्थ है हिंसा न करना और इसका व्यापक अर्थ है-किसी भी प्राणी को तन, मन, कर्म, वचन और वाणी से कोई नुकसान न पहुंचाना। मन में किसी का अहित न सोचना, किसी को कटुवाणी द्वारा भी नुकसान न देना तथा कर्म से भी किसी भी अवस्था में, किसी भी प्राणी की हिंसा न करना यह अहिंसा है। जैन धर्म में अहिंसा का बहुत महत्व है। आधुनिक काल में महात्मा गांधी ने भारत की आजादी के लिए जो आंदोलन चलाया वह काफी सीमा तक अहिंसात्मक था। जैन धर्म में सब जीवों के प्रति संयमपूर्ण व्यवहार अहिंसा है। आज के युग में जहां चारों ओर चोरी-डकैती,मारधाड़, लूटपाट आतंकवाद फैला हुआ है। ऐसे देश में आप कितनी ही बड़ी-बड़ी बातें करें। ये सब बेमानी लगती हैं। क्योंकि आज हर मनुष्य की चाहत पैसा,ऐशोआराम की चीजें और जल्द से जल्द अमीर बनने की चाहत ने आम आदमी को झकझोर कर रख दिया है। महामंगलकारी अनुष्ठान का आयोजन में साध्वी सुक्रति, साध्वी अंशिता, साध्वी हर्षिता आदि शामिल हुई । प्रायोजक कोलकाता प्रवासी उद्यमी एवं भामाशाह शंकरलाल सुरोलिया, पर्यटन विशेषज्ञ मधुसुधन खेमाणी,अंशु सुरोलिया, गुंजन बाला, प्रेमदेवी सौलंकी, पिंकी टेलर, मधुदेवी पारीक, एकता सुरोलिया आदि ने सभी साध्वीयों का स्वागत किया

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