याचिकाकर्ता डॉ. जितेंद्र सिंह पर हमला,:मारपीट का वीडियो आया सामने, हाईकोर्ट के आदेश पर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद हुईं घटना

झुंझुनूं जिले के सुल्ताना कस्बे में जोहड़ भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ने अब हिंसक रूप ले लिया है। राजस्थान हाईकोर्ट के आदेश पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई के बाद, मामले के मुख्य याचिकाकर्ता डॉ. जितेंद्र सिंह शेखावत के साथ बीच सड़क पर मारपीट का मामला सामने आया है। घटना का वीडियो भी सामने आया है। जिसमें कुछ लोग उन पर हमला करते नजर आ रहे हैं। मंदिर जाते समय घेरा, लाठियों से किया हमला जानकारी के अनुसार, याचिकाकर्ता डॉ. जितेंद्र सिंह आज की सुबह करीब 9:30 बजे अपने घर से मंदिर जाने के लिए निकले थे। इसी दौरान बाईपास रोड पर बिद्दीचंद चांवरिया और राजू चांवरिया ने उन्हें रोक लिया। पहले उनके बीच बहस शुरू हुई और देखते ही देखते विवाद बढ़ गया। डॉ. जितेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि बहस के दौरान ही घीसाराम चांवरिया मौके पर पहुंचे, उनके साथ कई महिलाएं भी थीं। आरोप है कि इन सभी ने मिलकर डॉ. जितेंद्र पर लाठियों से हमला कर दिया। मारपीट में उन्हें चोटें आई हैं। घटना के बाद क्षेत्र में तनाव की स्थिति बनी हुई है। पूर्व पालिका चेयरमैन के खिलाफ रिपोर्ट जितेंद्र सिंह शेखावत ने सुल्ताना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराते हुए नगर पालिका के पूर्व चेयरमैन घीसाराम चावरिया, उनके पुत्रों और अन्य सहयोगियों पर लाठी-डंडों से हमला करने का आरोप लगाया है। जितेंद्र सिंह ने बताया कि उन्होंने गांव की जोहड़, चारागाह और सड़क पर हुए अवैध अतिक्रमण के खिलाफ राजस्थान उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) लगा रखी है। कोर्ट के आदेश के बावजूद अतिक्रमण नहीं हटने पर उन्होंने अवमानना याचिका भी दायर की है। इसी रंजिश को लेकर गुरुवार सुबह करीब 10 बजे जब वे बस स्टैंड की ओर जा रहे थे, तब हरिनारायण अस्पताल के पास आरोपियों ने उन पर हमला कर दिया। रिपोर्ट में पूर्व चेयरमैन घीसाराम, रविंद्र, सूरज व अन्य के खिलाफ कठोर कानूनी कार्यवाही करने की मांग की है। प्रशासन ने हटाए थे 25 अतिक्रमण सुल्ताना पालिका क्षेत्र के जोडिया रोड स्थित खसरा नंबर 1090 (गैर मुमकिन जोहड़ भूमि) पर राजस्थान हाईकोर्ट के आदेशों की पालना में बड़ी कार्रवाई की गई थी। चिड़ावा तहसीलदार रामकुमार पूनिया के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम ने जेसीबी की मदद से 25 कच्चे-पक्के अतिक्रमण ध्वस्त किए थे। हालांकि, प्रशासन ने मानवीय आधार पर भूमिहीन परिवारों के रहवासी मकानों को फिलहाल नहीं छेड़ा है।

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