नीमच में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एसडीएम संजीव साहू को मुख्यमंत्री के नाम एक व्यंग्यात्मक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें ‘गुड़ के बीज’ और ‘गुड़ रोपण अधिकारी’ की तत्काल नियुक्ति की मांग की गई है। दरअसल, मुख्यमंत्री मोहन यादव के एक हालिया बयान ने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। इस बयान के बाद, नीमच कांग्रेस ने विरोध का एक अनोखा तरीका अपनाया है। उच्च गुणवत्ता वाले ‘गुड़ के बीज’ उपलब्ध कराने की मांग यह ज्ञापन कांग्रेस जिलाध्यक्ष तरुण बाहेती के नेतृत्व में सौंपा गया। इसमें कहा गया है कि चूंकि अब प्रदेश में खेती की तकनीक बदल गई है, इसलिए किसानों को पारंपरिक तरीके से गन्ना बोने की आवश्यकता नहीं है। कांग्रेस ने प्रशासन से मांग की है कि जिले के किसानों को जल्द से जल्द उच्च गुणवत्ता वाले ‘गुड़ के बीज’ उपलब्ध कराए जाएं। साथ ही, इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए तत्काल प्रभाव से ‘गुड़ रोपण अधिकारी’ की नियुक्ति की जाए। किसानों ने सत्ता पक्ष पर कसा तंज कांग्रेस ने इस ज्ञापन के माध्यम से सत्ता पक्ष पर तीखा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि अब तक किसान गन्ने की खेती में बेवजह पसीना बहाते थे, उसे काटकर मिलों तक ले जाते थे और फिर घंटों कड़ाहे में जलाकर गुड़ बनाते थे। लेकिन, मुख्यमंत्री की इस ‘क्रांतिकारी’ सोच ने किसानों की सारी मेहनत बचा ली है। ज्ञापन में चुटकी लेते हुए यह भी कहा गया कि जब सीधे खेतों में गुड़ की डलियां उगेंगी, तो किसानों को न तो यूरिया की लंबी लाइनों में लगना पड़ेगा और न ही खाद की कालाबाजारी का सामना करना पड़ेगा। कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री के उस पुराने दावे को भी याद दिलाया, जिसमें उन्होंने एक बीघे में 50 क्विंटल गेहूं उगाने की बात कही थी। गुड़ के बीजों के पैकेट वितरित करने की जताई उम्मीद ज्ञापन के अंत में व्यंग्यात्मक रूप से उम्मीद जताई गई कि नीमच प्रशासन जल्द ही गुड़ के बीजों के पैकेट वितरित करेगा, ताकि नीमच दुनिया में गुड़ उत्पादन का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरे। फिलहाल, यह ‘मीठा कटाक्ष’ सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा का केंद्र बना हुआ है।


