अमृतसर में कारोबारियों का सरकार के खिलाफ प्रदर्शन:मांस, शराब, तंबाकू की दुकानें बंद करने का विरोध, पवित्र शहर का दर्जा देने का मामला

पंजाब के मुख्यमंत्री द्वारा राज्य के तीन शहरों को पवित्र शहर का दर्जा देने की घोषणा के बाद अमृतसर में विवाद गहराता जा रहा है। इस फैसले के तहत अमृतसर में मांस, शराब और तंबाकू-बीड़ी की दुकानों को बंद करने की बात कही गई है। सरकार के इस निर्णय से जहां एक ओर धार्मिक भावनाओं से जुड़े वर्गों में समर्थन देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इससे जुड़े कारोबारियों में भारी रोष फैल गया है। गुरुवार को मांस, शराब और तंबाकू कारोबार से जुड़े सैकड़ों व्यापारी अमृतसर के गोल बाग इलाके में एकत्र हुए और सरकार के फैसले के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी की और सरकार से इस फैसले पर तत्काल पुनर्विचार की मांग की। दुकानदार बोले- रोजी-रोटी पर पड़ेगा सीधा असर प्रदर्शन के दौरान दुकानदार वरुण सैनी सहित अन्य व्यापारियों ने कहा कि इस फैसले से हजारों परिवारों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ेगा। आरोप लगाया कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था और पूर्व सूचना के लिया गया यह निर्णय पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। व्यापारियों का कहना है कि वे पीढ़ियों से इसी शहर में रहकर अपना व्यवसाय कर रहे हैं और अब अचानक दुकानों को बंद कर देने से उनके सामने रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। व्यापारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन उनका सुझाव है कि यदि अमृतसर को पवित्र शहर का दर्जा दिया जाना है तो इसके लिए श्री दरबार साहिब के आसपास के कुछ सीमित क्षेत्रों को चिह्नित किया जाए। पूरे शहर में लागू ना किया जाए उन्हीं इलाकों में इस तरह की दुकानों पर प्रतिबंध लगाया जाए, न कि पूरे शहर में। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मौजूदा दुकानें बंद कर दी गईं तो वे नए सिरे से कहां जाकर व्यापार शुरू करेंगे। प्रदर्शन के मद्देनजर मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। हालांकि, प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और किसी तरह की अप्रिय घटना सामने नहीं आई। पुलिस अधिकारियों ने स्थिति पर नजर बनाए रखी और प्रदर्शनकारियों से संवाद कर माहौल को शांत बनाए रखा। फिलहाल यह मुद्दा अमृतसर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। व्यापारी संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। वहीं, सभी की निगाहें अब सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि वह इस फैसले में कोई संशोधन करती है या नहीं।

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