काम शिफ्ट नहीं छोड़ ही देंगे, सेटल करना संभव नहीं : प्रितपाल

भास्कर न्यूज | अमृतसर गुरुनगरी को पवित्र वॉल्ड सिटी का दर्जा दिए जाने के बाद मीट, कच्चा मीट और तंबाकू का कारोबार करने वाले दुकानदारों में चिंता गहराने लगी है। वीरवार को गोलबाग क्षेत्र में इन कारोबारियों ने एकत्र होकर सरकार से अपील की कि इस फैसले की आड़ में उन्हें उनके पारंपरिक रोजगार से उजाड़ा न जाए। दुकानदारों ने कहा कि वे सरकार के फैसले का सम्मान करते हैं और गुरुनगरी की पवित्रता बनाए रखने के पक्ष में हैं, लेकिन इसके साथ ही उनके परिवारों की आजीविका की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। व्यापारियों का कहना है कि वे दशकों से इसी स्थान पर अपना कारोबार कर रहे हैं। कई दुकानदार ऐसे हैं, जिनके परिवार पाकिस्तान से उजड़ कर भारत आए थे और तभी से इसी पेशे से जुड़े हुए हैं। व्यापारियों ने आशंका जताई कि यदि उन्हें शहर के भीतर से हटाकर कहीं और बसाया गया तो उनका कारोबार चल पाना संभव नहीं होगा। बता दें कि शहर के 12 गेटों के अंदरून इलाकों में करीब 5 हजार कच्चे मीट व पके मीट की दुकानें करने वाले दुकानदार है। इनके अलावा 200 के करीब पान व तंबाकू का काम करने वाले दुकानदार शामिल हैं। दुकानदारों ने सुझाव दिया इस संबंधी पुनर्विचार किया जा सकता है। यदि वर्तमान में यह दायरा 100 मीटर तय है तो इसे बढ़ाकर 200 मीटर किया जाए । उनका कहना था कि केवल 12 गेटों के भीतर आने वाले दुकानदारों को ही उजाड़ देना न्यायसंगत नहीं है। सभी ने एकजुट होकर रणनीति तैयार की कि वह मंगलवार को डिप्टी कमिश्नर, नगर निगम कमिश्नर और मेयर के साथ मुलाकात करेंगे। जसमीत सिंह का कहना है कि वह गिलवाली गेट चौक चबूतरा में सन 1965 से मोहन सिंह मीट शॉप चला रहे हैं। उन्होंने कहा काफी दुख हुआ कि उन्हें अब उजाड़ा जा रहा है। वह सरकार से यही मांग करते हैं कि दायरा बढ़ा देना चाहिए और दुकाने यहीं रहने दें। अपने बच्चे कैसे पालेंगे। जो बैंक से लोन लिया है, वह कैसे भरेंगे। शरनजीत सिंह गोगी का कहना था कि वह फैसले का स्वागत करते हैं। लेकिन हजारों परिवार उजड़ जाएंगे। सरकार को उनका इंतजाम करना चाहिए। लोग 60-70 बरसों से कारोबार कर रहे हैं। पहले 100 मीटर का दायरा था, लेकिन अब सरकार को 200 या 250 मीटर का दायरा कर देना चाहिए। जसपाल सिंह का कहना था कि उनके दादा जी 1947 के बाद पाक से लायलपुर से पिछड़ कर भारत आए थे। तब उनके दादा ने कटरा कर्म सिंह में बिल्ला मीट शॉप की दुकान खोली और तभी से वह यही काम करते आ रहे हैं। आज यह दौर आ गया है कि सरकार ने एकदम कह दिया कि वह काम बंद कर दें। हाल गेट के अंदर पंजाब ढाबा चलाते आ रहे प्रितपाल सिंह का कहना था कि इसके लिए पहले सरकार को कच्चे मीट, पके मीट व रेस्टोरेंट और तंबाकू आदि दुकानदारों के साथ बैठक करनी चाहिए थी । एकदम से आकर सरकार ने कह दिया कि काम बंद कर दो तो काम ऐसे कैसे बंद किया जा सकता है। उनके पिता 1957 से काम करते आ रहे हैं, हमारा फ्यूचर कुछ नजर नहीं आ रहा है। फिलहाल मीट–शराब और सिगरेट के दुकानदार सरकार के फैसले को मानने के हक में नहीं दिख रहे है। दुकानदार सरकार के फैसले में राहत लेने या उसे बदलवाने के लिए हाईकोर्ट में रिट याचिका लगा सकते हैं। वे ये कह सकते हैं कि बिना कोई दूसरा रास्ता दिए कमाई और बिजनेस पर सीधा असर पड़ा है। पूरा वाल्ड सिटी बंद करने की जरूरत नहीं, रोक को सिर्फ धार्मिक रास्तों या टेंपल रूट तक सीमित किया जाए। इसके अलावा ट्रेडर्स एसोसिएशन की तरफ से पीआईएल, प्रशासन को लिखित आपत्ति और लाइसेंस की वैधता दिखा स्टे लेने की कोशिश की जा सकती है, ताकि आदेश को रोक या मॉडिफाई करवाया जा सके।

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