केंद्र सरकार की तरफ से मनरेगा कानून में किए गए संशोधन को लेकर कांग्रेस अब गांव-गांव जाकर मोर्चा खोलेगी। प्रदेश कांग्रेस ने तय किया है कि राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में जागरूकता अभियान चलाकर मजदूरों को यह बताया जाएगा कि मनरेगा कानून में बदलाव से उन्हें कैसे नुकसान हो रहा है। यह अभियान केंद्र सरकार द्वारा ग्राम सभाओं के जरिए फैलाए जा रहे भ्रम के जवाब में चलाया जाएगा। कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार 26 दिसंबर से पहले देश के हर गांव में ग्राम सभा आयोजित कर जी-राम-जी कानून को गरीबों के हित में बताने की कोशिश कर रही है, जबकि हकीकत इसके ठीक उलट है। कांग्रेस के मुताबिक, नए कानून के जरिए ग्रामीण मजदूरों से काम की कानूनी गारंटी छीनी जा रही है, जो पहले मनरेगा के तहत सुनिश्चित थी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि भाजपा सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से मनरेगा की मांग-आधारित व्यवस्था को कमजोर किया है। काम की कानूनी गारंटी खत्म कर दी गई है और अब रोजगार को बजट और प्रशासनिक फैसलों पर छोड़ दिया गया है। यह करोड़ों ग्रामीण मजदूरों की आजीविका पर सीधा हमला है और देश की सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश है। जिला और ब्लॉक कमिटी को दिए निर्देश दीपक बैज ने जिला, ब्लॉक, नगर और शहर कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्षों सहित सभी मोर्चा संगठनों और विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे पार्टी कार्यकर्ताओं, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों और अग्रिम संगठनों को संगठित कर आगामी ग्राम सभाओं में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का उद्देश्य शांतिपूर्ण और तथ्यों के साथ यह समझाना है कि भाजपा सरकार ने कैसे मजदूरों के रोजगार के अधिकार को छीना है और अधिकार आधारित योजना को सीमित बजट वाली स्कीम में बदल दिया है। कांग्रेस ग्रामीण मजदूरों के साथ खड़ी है और काम के अधिकार, सामाजिक न्याय और श्रम की गरिमा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। कांग्रेस क्यों कर रही है विरोध? कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा के तहत गांवों को यह अधिकार था कि वे अपनी जरूरत के अनुसार काम तय करें। मजदूरों को तय समय पर पूरी मजदूरी मिलती थी। अब नए ढांचे में इन अधिकारों पर असर पड़ने की आशंका है। सरकार नए कानून में सालाना रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 करने की बात कर रही है। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि जब छत्तीसगढ़ में पहले ही ज्यादातर परिवारों को 100 दिन का काम नहीं मिल पा रहा, तो 125 दिन का दावा कैसे पूरा होगा। नए प्रावधान के मुताबिक, खेती के मौसम में सरकारी रोजगार के काम नहीं कराए जाएंगे। सरकार इसे किसानों के हित में बता रही है, लेकिन कांग्रेस का कहना है कि इससे ग्रामीण मजदूरों के कुल काम के दिन घट सकते हैं। राज्यों पर बढ़ेगा आर्थिक बोझ कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि नए फंडिंग फॉर्मूले से राज्यों पर खर्च का बोझ बढ़ेगा। अब छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों को योजना का 40 प्रतिशत खर्च खुद उठाना होगा, जिससे योजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ सकता है। 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में प्रति परिवार औसतन करीब 52 दिन का ही रोजगार मिल पाया। केवल 14 प्रतिशत परिवारों को पूरे 100 दिन का काम मिला। महिलाओं और आदिवासियों की भागीदारी ज्यादा होने के बावजूद उन्हें भी सीमित रोजगार मिला। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मनरेगा को कमजोर करने का कोई भी प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर रोजगार की गारंटी से छेड़छाड़ की गई, तो प्रदेश से लेकर संसद तक आंदोलन किया जाएगा।


