खींचन में कुरजां महोत्सव शुरू:पक्षियों को देखने के बाद हवेलियों का किया भ्रमण, कल होगी मटका दौड़, रस्सा-कसी प्रतियोगिताएं

फलोदी के खींचन गांव में दो दिवसीय कुरजां महोत्सव आज सुबह 8:30 बजे शुरू हुआ। कलेक्टर श्वेता चौहान और विधायक पब्बाराम विश्नोई ने महोत्सव का उद्घाटन किया। यह महोत्सव पर्यटन विभाग और जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया है। महोत्सव के PHOTOS… खींचन रामसर साइट घोषित खींचन गांव कुरजां पक्षियों के शीतकालीन प्रवास के लिए प्रसिद्ध है। इन पक्षियों को देखने के लिए हजारों देशी-विदेशी पर्यटक यहां पहुंचते हैं। हाल ही में खींचन को रामसर साइट घोषित किया गया है। महोत्सव की औपचारिक शुरुआत चुग्गाघर के सामने की गई। कलेक्टर और विधायक ने अन्य अतिथियों के साथ चुग्गाघर में दाना चुग रही कुरजां पक्षियों का अवलोकन किया। इस दौरान लोक कलाकारों ने लोकगीतों की प्रस्तुति दी। हवेलियों का भ्रमण किया यहां से अतिथियों का काफिला खुली कारों में हवेलियों के भ्रमण के लिए रवाना हुआ। कलेक्टर श्वेता चौहान और विधायक पब्बाराम विश्नोई साफा पहने हुए आगे की कार में सवार थे। उनके पीछे अन्य अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे। यह दल रास्ते में हवेलियों का भ्रमण करते हुए जागीर कोट पहुंचा। खींचन में सौ साल से भी अधिक पुरानी हवेलियां है। ये हवेलियां नक्काशीदार बुर्ज और शानदार कलाकृतियों के कारण गांव के पुराने गौरव को दर्शाती हैं। जागीर कोट में अतिथियों का स्वागत-सम्मान किया गया। सरपंच लता कंवर, भाजपा नेता रेवंतसिंह राजपुरोहित और प्रेम सिंह राजपुरोहित सहित अन्य स्थानीय प्रतिनिधियों ने अतिथियों को साफा और माला पहनाकर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे। आज शाम को होने वाले कार्यक्रम
कुरजां महोत्सव में आज शाम मेजर शैतान सिंह स्टेडियम में हस्तशिल्प उत्पाद, चित्रकला प्रदर्शनी अवलोकन, कैमल डांस, कबड्‌डी प्रतियोगिता, रंगोली, मेहंदी-माण्डणा और मल्लाश्री प्रतियोगिता होगी।
मेजर शैतानसिंह स्टेडियम में रात 7 से 9.30 बजे तक सांस्कृतिक संध्या होगी। स्थानीय गायक कलाकारों के अलावा इंडियन आईडल फेम गायक सवाई भाट, गायिका रेनू नागर प्रस्तुति देंगी। 27 दिसंबर को होने वाले कार्यक्रम
सुबह 10 बजे श्रीलटियाल माता मंदिर विद्यालय प्रांगण से रानीसर तालाब तक शोभायात्रा। सुबह 11 बजे से मेजर शैतानसिंह स्टेडियम में फैंसी ड्रेस, साफा बांध, मिस्टर/मिस/फलोदी, मटका दौड़, रस्सा-कसी प्रतियोगिताएं होगी दोपहर 2.30 बजे पुरस्कार वितरण और समापन समारोह होगा। हर साल झुंड में आते पक्षी
पर्यावरण प्रेमी राधेश्याम पेमानी ने बताया कि साइबेरिया, मंगोलिया, कजाकिस्तान मध्य एशिया से हर साल कुरजां पक्षी झुंड में पश्चिमी राजस्थान में प्रवास करती है। हिमालय की ऊंचाइयों को पार कर ये भारत में प्रवेश करती है और मार्च-अप्रैल के करीब वापस लौट जाती है। वजन दो से ढ़ाई किलो, तरबूज पसंदीदा खाना
प्रवासी पक्षी कुरजां का वजन दो से अढ़ाई किलो का होता है। ये पानी के आसपास खुले मैदान और समतल जमीन पर ही अपना अस्थायी डेरा डालकर रहते है। इन पक्षियों का मुख्य भोजन मोतिया घास होती है। पानी के पास पैदा होने वाले कीड़े-मकोड़े खाकर कुरजां अपना पेट भरती है। इस साल अच्छी बारिश से इलाके में तरबूज की बढ़िया फसल होगी जो कुरजां का पसंदीदा भोजन है।

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