नागौर जिले में श्री सीमेंट कंपनी द्वारा भूमि अधिग्रहण के लिए एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) प्राप्त करने की प्रक्रिया के बीच एक नया और विवाद खड़ा हो गया है। पिथासिया, खेतौलाव, हरीमा, सरासनी और सोमणा गांवों के ग्रामीणों ने कंपनी पर धोखाधड़ी और दस्तावेजों में हेराफेरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने इस संबंध में कलेक्टर को सामूहिक ज्ञापन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज कर कंपनी को एनओसी जारी की गई, तो वे उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे। बैठक में एकराय से किया था विरोध ग्रामीणों ने ज्ञापन में बताया कि 24 दिसंबर को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय से संबंधित एनओसी प्रक्रिया को लेकर एक बैठक आयोजित की गई थी। यह बैठक अतिरिक्त जिला कलेक्टर (भूमि अवाप्ति अधिकारी) की उपस्थिति में हुई, जिसमें सभी प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने एकमत होकर श्री सीमेंट कंपनी को एनओसी देने का विरोध किया था। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने अपनी लिखित आपत्तियां भी दर्ज करवाई थीं। अधिकारियों के जाते ही रची गई साजिश का आरोप ग्रामीणों का आरोप है कि बैठक समाप्त होने और अधिकारियों के वहां से जाने के बाद कंपनी के कर्मचारियों ने षड्यंत्र रचते हुए फर्जी तरीके अपनाए। आरोप के अनुसार, कंपनी ने अपने ही मजदूरों और बाहरी व्यक्तियों को स्थानीय निवासी और काश्तकार बताकर सहमति पर फर्जी हस्ताक्षर करवा लिए। फर्जी दस्तावेजों से सहमति दिखाने का आरोप ग्रामीणों का कहना है कि इन फर्जी हस्ताक्षरों के आधार पर तैयार किए गए सहमति पत्रों को प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत कर यह दर्शाने की कोशिश की गई कि गांव के लोग कंपनी को एनओसी देने के लिए सहमत हैं। ग्रामीणों ने इसे प्रशासन को गुमराह करने का प्रयास बताया है। दोषियों पर मुकदमा दर्ज करने की मांग ग्रामीणों ने ज्ञापन में मांग की है कि जिन बाहरी व्यक्तियों के आधार कार्ड और दस्तावेजों का उपयोग कर कथित तौर पर फर्जी सहमति पत्र तैयार किए गए हैं, उनकी पहचान कर उनके खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया जाए। साथ ही राजस्व रिकॉर्ड की गहन जांच की मांग की गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सहमति देने वाले लोग वास्तव में उन गांवों के खातेदार नहीं हैं। ग्रामीण बोले– न पहले सहमत थे, न अब हैं ग्रामीणों ने दो टूक कहा है कि वे न तो पहले इस परियोजना के लिए सहमत थे और न ही वर्तमान में किसी भी स्तर पर अपनी सहमति दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनकी आपत्तियों को अनदेखा कर एनओसी जारी की गई, तो वे लोकतांत्रिक तरीके से उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।


