उदयपुर की नगर निगम में इस बार नगरीय विकास शुल्क (UD) को लेकर इस बार अच्छा रिस्पांस है। इस वित्तीय वर्ष (2025-26) के 9 महीनों में अब तक 7 करोड़ 85 लाख रूपए की आय हुई है। नए साल की शुरुआत तक यह आंकड़ा 8 करोड़ रूपए को पार हो जाएगा। इस बार मार्च 2026 तक 20 करोड़ रूपए का टैक्स वसूलने का टारगेट है। निगम ने पिछले वित्तीय वर्ष (2024-25) में 18 करोड़ 68 लाख वसूला था। 15वें वित्त आयोग से मिलने वाली ग्रांट के लिए इस टारगेट का पूरा होना जरूरी होता है। नए साल से अंतिम 3 महीनों में टैक्स वसूली में तेजी आएगी। नगर निगम के पास यूडी टैक्स के दायरे में करीब 20 हजार संपत्तियां दायरे में है। निगम ने इनकी गणना के बाद इनको डिमांड भेजी है। इसमें कई नई संपत्तियां भी चिन्हिृत है। इस बार नगर निगम ने पहली बार अपनी वेबसाइट पर सुझाव और शिकायत भेजने की प्रकिया शुरू की है। इस बार लोग उनकी समस्या और आपत्ति ऑनलाइन दर्ज करवा सकते हैं। नगर निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने बताया कि पिछले साल 2024 के अंतिम दिन तक 4 करोड़ रूपए की आय हुई थी। इस बार पिछले साल के मुकाबले लगभग आय हुई है। यूडी टैक्स को लेकर लोग वित्तीय वर्ष के लास्ट टाइम तक का इंतजार करते हैं, जो ठीक नहीं है। निगम पेंडेसी के आधार पर अब जल्द एक बार और नोटिस भी जारी करेगा। खन्ना ने बताया कि इस बार डिजिटल प्रयोग किया गया है। हर संपति मालिक को भेजे गए बिल में क्यूआर कोड दिया गया है, जहां से पेमेंट करने के साथ पेंडेंसी और उसके लेटेस्ट जानकारी भी प्राप्त हो सकती है। इसके लिए राजस्थान म्यूंसिपल की वेबसाइट पर सीधे जाकर जानकारी देखी जा सकती है। उन्होंने बताया कि समय से टैक्स जमा कराकर सरकार ने जो छूट दी है, उसका फायदा उठाए। उदयपुर शहर में 2700 वर्ग फीट से ज्यादा आवासीय और 900 वर्ग फीट से ज्यादा व्यावसायिक भूखंड धारियों से डीएलसी रेट के हिसाब से यूडी टैक्स लिया जाता है। पिछले साल निगम ने यूडी टैक्स नहीं जमा होने पर 60 से ज्यादा संपतियां सीज की थी। पिछले साल में बिल्डिंग, दुकानें और सरकारी ऑफिसों पर हुई सीज की कार्रवाई के डर से कई लोगों ने निकली डिमांड के तहत यूडी टैक्स जमा करा दिया है।


