भास्कर न्यूज | अमृतसर असम उमरागांछू खदान में 150 फीट के नीचे फंसे लोगों को रेस्क्यू करके निकालने की नाकाम कोशिश के बीच माइनिंग इंजीनियर स्व. जसवंत सिंह गिल के बेटे डॉ. सरप्रीत सिंह ने केंद्र सरकार को पत्र लिख कर मांग की है कि उनके पिता जी की तकनीक कैप्सूल गिल को सभी राज्यों में इस्तेमाल करने को कहा जाए। उनका कहना है कि इससे कम खर्चे पर हम खदानों, खाइयों और गुफाओं में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाल सकते हैं। गिल ने मंगलवार को मीडिया से रूबरू होते हुए कहा कि असम की उक्त खान में 6 जनवरी से 150 फीट के नीचे 40 लोग फंसे थे। उनमें से सभी निकल गए लेकिन 9 रह गए। तमाम फोर्सेज रेस्क्यू में लगीं लेकिन अभी तक सिर्फ 4 की लाश मिली हैं। डॉ. गिल ने कहा कि उनके पिता ने साल 1989 में पश्चिम बंगाल के रानी गंज की महाबीर कोयला खान में 350 फीट नीचे फंसे 65 लोगों को लोहे का कैप्सूल बना कर सुरक्षित निकाला था, जिसके लिए उनको सर्वोत्तम जीवन रक्षा पदक, समेत कई अवार्ड मिली और उन पर फिल्म मिशन रानी गंज भी बनी। उनका कहना है कि उनके पिता की तकनीक को विदेशों में अपनाया जा रहा है। लेकिन अपने देश में उसका इस्तेमाल न होने से समय-समय पर खदानों में लोगों की मौतें हो रही हैं। उनका कहना है कि इस तकनीक को आपदा प्रबंधन के दौरान हरेक सूबा अपनाए ताकि लोगों को बचाया जा सके ।


