छत्तीसगढ़ में 2023 की तुलना में 2024 में सड़क हादसे 10%, मौतें 9.5% बढ़ गईं हैं। रोज औसतन 19 लोगों की जान हादसे में जा रही है और 34 गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं। यह खुलासा ट्रैफिक पुलिस के नए साल की शुरुआत में किए गए सर्वे से हुआ है। इसमें सामने आया कि ज्यादातर हादसे बड़े शहरों में हो रहे हैं। जहां चौड़ी और सपाट सड़कें हैं। दुर्घटनाओं की बड़ी वजह हाईस्पीड और ओवरटेक है। इसके अलावा अंधेरा प्रमुख कारण है, क्योंकि आबादी के आसपास अंधेरे में नजर आने वाले मवेशी या छोटी गाड़ियां आपस में टकरा जाती हैं। हाइवे पर हादसों में प्रदेशभर में जितनी भी मौतें हो रही हैं, उनमें 35% यानी एक-तिहाई 6 जिलों रायपुर, कोरबा, रायगढ़, बिलासपुर, सरगुजा और दुर्ग में दर्ज की गई हैं। बाकी 65% हादसे 27 जिलो में हैं। ये स्थिति तब है जब पुलिस लगातार दावा कर रही है कि हादसे रोकने के लिए रोड इंजीनियरिंग में सुधार, ब्लैक स्पाट की पहचान और सुधार जारी है।हादसे इन कारणों से | {सड़कों पर लाइट कम {मालवाहकों व ट्रैक्टर में ढो रहे सवारियां हाईवे में बाइपास सड़क से अचानक एंट्री {नशे में हाईस्पीड ड्राइविंग, गाड़ी ओवरलोड {अधिक रोशनी वाली हेडलाइट का उपयोग {हेलमेट, सीटबेल्ट, इंडिकेटर का उपयोग नहीं। प्रति 1 लाख पर सबसे ज्यादा मौतें ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च एंड इंजूरी प्रिवेंशन की सर्वे रिपोर्ट 2021 के अनुसार हादसों में मौतों की संख्या तमिलनाडु, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा है। प्रति 1 लाख लोगों पर तमिलनाडु में (21.9), तेलंगाना (19.2), और छत्तीसगढ़ (17.6) लोग मारे जाते हैं। हालांकि छत्तीसगढ़ पुलिस का दावा है कि 2030 तक हादसे और मौत में 50 फीसदी कमी जो टारगेट दिया गया है। उसे पूरा कर लिया जाएगा। 6 साल में 519 ब्लैक स्पॉट सुधरे, 108 बाकी 2016 में हुए सर्वे में प्रदेशभर में 627 ब्लैक स्पॉट मिले थे, जहां ज्यादा हादसे हो रहे थे। इस तरह, पिछले करीब 6 साल में 519 ब्लैक स्पॉट में सुधार किया गया है। अब 108 ब्लैक स्पॉट ही बचे हैं, जहां हादसे हो रहे हैं। भास्कर एक्सपर्ट – संजय शर्मा, एएआईजी ट्रैफिक ट्रैफिक के दबाव से शहरी क्षेत्र में सड़क हादसे बढ़ रहे, राजधानी सबसे प्रभावित शहरी क्षेत्र में सड़क हादसे बढ़ने की वजह ट्रैफिक का दबाव है। राज्य में सबसे ज्यादा गाड़ियों की संख्या और ट्रैफिक का दबाव रायपुर में है। ज्यादातर हादसे शहर के आउटर और औद्योगिक क्षेत्र के आसपास हो रहे हैं। आउटर में अंधेरा और मवेशी भी होते हैं। शहर के बाहर निकलते ही गाड़ियों की रफ्तार भी बढ़ जाती है। इसे रोकने के लिए लगातार संबंधित एजेंसियों के साथ सर्वे किया जा रहा है। रोड इंजीनियर में सुधार किया जा रहा है। लोगों को सजग भी किया जा रहा है।


