भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की स्थापना के 150 साल बुधवार को पूरे हो रहे हैं। राजधानी रायपुर में 55 साल पहले मौसम विभाग का दफ्तर खुला। मेरी नियुक्ति के समय 1992 में रायपुर मौसम केंद्र में हम मैनुअल चार्ट बनाते थे। फिर उसका विश्लेषण होता था। हवा की गति और दिशा के लिए गुब्बारे छोड़ते थे। तापमान, बारिश, हवा, नमी और अन्य जानकारी के लिए कर्मचारी बार-बार मशीन के पास जाकर डेटा लेता था। इस तरह शुरुआत में सिर्फ 48 घंटे यानी दो दिन का ही पूर्वानुमान करते थे। धीरे-धीरे टेक्नोलॉजी बढ़ती गई। राज्य बनने के बाद 2002 में मेट्रोलाजिकल सेंटर की स्थापना के साथ रायपुर ने मौसम पूर्वानुमान और कृषि सलाह जारी करना शुरू किया। तब सटीकता 45% के आसपास थी। पिछले दो दशकों में अनुमान की सटीकता दोगुना कर 85% से अधिक कर दी है। चक्रवात पूर्वानुमान 90% से अधिक सही आ रहा है। अभी एक्टेंडेड फॉरकास्ट 15 दिन और महीनेभर के लिए आउटलुक जारी किया जाने लगा है। अभी हमारा सैटेलाइट 36000 किमी की दूरी से आब्जर्वेशन कर रहा है। इसमें पिक्चर की क्वालिटी कमजोर है। हमें एडवांस पोलर सिस्टम पर जाना होगा। यह 1000 किमी की दूरी से इमेज ले सकेगा, जो काफी स्पष्ट होगा। डॉप्लर राडार का पूर्वानुमान में सटीकता लाने में अहम योगदान है। रायपुर में खुद का डॉप्लर भी लग चुका है। शुरुआत… 1970 में हाथ से चलने वाले उपकरणों से शुरुआत हुई थी अब हाईटेक युग…डॉप्लर राडार से पूर्वानुमान


