जशपुर में वनवासी कल्याण आश्रम का 73वां स्थापना दिवस:लोककला संगम में दिखा जनजातीय संस्कृति का विराट स्वरूप, वित्त मंत्री ओपी चौधरी हुए शामिल

जशपुर में अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम का 73वां स्थापना दिवस मनाया गया। शहर के जिला चिकित्सालय के समीप स्थित अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय प्रांगण झांझ और मांदर की थाप से गूंज उठा। इस अवसर पर आयोजित लोक कला संगम कार्यक्रम में जिले भर के लोक नर्तक दलों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। वनवासी कल्याण आश्रम के महामंत्री योगेश बापट ने बताया कि अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम की नींव 26 दिसंबर 1952 को रखी गई थी। कल्याण आश्रम ने जनजातियों की मूल रीति-रिवाजों और परंपराओं को सहेजने के साथ उन्हें शिक्षित, आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और जागरूक करने की दिशा में कार्य शुरू किया। समारोह में सामूहिक दौड़ और लोकनृत्य का आयोजन स्थापना दिवस के अवसर पर सामूहिक दौड़ और लोकनृत्य का आयोजन किया गया। इस नृत्य संगम में जिले भर से सौ से अधिक नर्तक दलों ने भाग लिया। कड़ाके की सर्दी के बावजूद सुबह से ही नर्तक दलों का आगमन शुरू हो गया था। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने भारत माता, वनवासी कल्याण आश्रम के पूर्व अध्यक्ष दिवंगत बाला साहेब देशपांडे, जगदेव राम और व्यवस्थापक प्रकाश काले के तैल चित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। पारंपरिक नृत्यों के साथ लोक कला संगम में उमड़ा उत्साह लोक कला संगम के माध्यम से जनजातीय संस्कृति के बहुरंगी आयाम को एक मंच पर प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया। पारंपरिक वेशभूषा में सजे लोकनर्तक दल करमा, सरहुल और डंडा नृत्य प्रस्तुत कर रहे थे। बच्चों और युवाओं के साथ बुजुर्ग महिला व पुरुषों का उत्साह भी देखते बन रहा था। इस लोकनृत्य को देखने के लिए शहर और आसपास के ग्रामीण अंचल से भारी संख्या में लोग कल्याण आश्रम के प्रांगण में उमड़े थे। वित्त मंत्री बोले- आदिवासी सेवा में जुटा वनवासी कल्याण आश्रम कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रदेश के वित्त मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि वनवासी कल्याण आश्रम पिछले 73 वर्षों से आदिवासी समाज की सेवा कर रहा है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। पहले भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में 14वें स्थान पर थी, लेकिन अब चौथे स्थान पर पहुंच गई है। ओपी चौधरी ने कहा कि भारत की इस प्रगति से कुछ देश परेशान हैं, इसलिए वे दूसरे देशों के सहारे भारत के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब पूरी दुनिया आदिवासी संस्कृति और उनके खान-पान की प्रशंसा कर रही है। पहले जिन मोटे अनाज (मिलेट्स) को गरीबों का खाना माना जाता था, आज उन्हें गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए अपनाया जा रहा है। आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को धर्मांतरण से खतरा: ओपी चौधरी उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी संस्कृति और परंपराओं को धर्मांतरण से सबसे ज्यादा खतरा है। इतिहास में आदिवासी समाज के स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को सही तरह से नहीं दिखाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस घोषित किया और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नवा रायपुर में जनजातीय संग्रहालय बनवाकर इस कमी को दूर करने का काम किया है। कार्यक्रम में वनवासी कल्याण आश्रम के मध्यक्षेत्र संगठन मंत्री सुभाष बड़ोले ने कहा कि आश्रम सीमित संसाधनों के बावजूद अलग-अलग योजनाओं के जरिए आदिवासियों की सेवा कर रहा है। उन्होंने बताया कि यह सेवा कार्य 1952 से लगातार चल रहा है और आगे भी जारी रहेगा। इस कार्यक्रम में एसईसीएल के डायरेक्टर गोविंद नारायण सिंह, कमल मेमोरियल ट्रस्ट के सचिव गोविंद नारायण सिंह, विधायक रायमुनि भगत, नगर पालिका अध्यक्ष अरविंद भगत, वरिष्ठ भाजपा नेता कृष्ण कुमार राय सहित कई जनप्रतिनिधि और गणमान्य लोग मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन सत्यप्रकाश तिवारी ने किया।

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