बिश्रामपुर | छत्तीसगढ़ के अन्न दान के पारंपरिक पर्व छेर छेरा की इन दिनों गांव गांव में घूम मची है। मकर संक्रांत के पहले और बाद तक अलग अलग गांवों में लोग छेर क्षेरा पर्व की खुशियों में डूबे हुए हैं। बता दें कि धान कटाई मिसाइ और फिर कोठी में धान रखने खेती किसानी के काम से फुर्सत होने की खुशी में किसान ग्रामीण इस पर्व को मनाते हैं। छेरता पर्व की वैसे कोई निर्धारित तिथि नहीं होती। ग्रामीण अपनी सुविधा के मुताबिक मकर संक्रांत से ठीक पहले और फिर बाद तक इसका दौर चलता है। गांव में बच्चों की टोली झोला लेकर एक दूसरे के यहां छेरता मांगने पहुंचते हैं। बच्चे छेर छेरा बोल अनाज मांगते है और ग्रामीण भी उत्साह पूर्वक बच्चों को धान अथवा खाद्य सामग्री दे उनका उत्साह वर्धन करते हैं। धान की फसल ठीक तरीके से काटने की खुशी में कृषक वर्ग छेरता मनाने अपने रिश्तेदार, दोस्त यार के यहां पहुंचते हैं और यहां दावतों का का दौर चलता है। कृषि यंत्रों की पूजा पाठ कर उसे अगले वर्ष के लिए सहेज कर कृषक रख देता हैं।


