जिला अस्पताल:जहां शीत लहर वहां बच्चे व प्रसूताएं भर्ती, वार्डों की खिड़कियां टूटी, बाथरूम गंदगी से अटे

बाड़मेर जिला अस्पताल के एमसीएच सेंटर के महिला, प्रसूता वार्ड, जननी वार्ड में खिड़कियों के कांच टूटे हुए हैं। जिसके कारण सर्द हवा से प्रसूता और नवजात दोनों ठिठुर रहे है। मरीजों की सुरक्षा के लिए अस्पताल प्रशासन ने खि​ड़कियों पर पर्दे लगाए हैं, लेकिन वह पर्दे भी फटे हुए हैं। इसके साथ ही खिड़कियों में लगी जालियों में भी बड़े-बड़े छेद हो रखे हैं। इसके कारण इन दिनों सर्द हवा से मरीज बेहाल है। कई जगह तो मरीजों के साथ आए परिजनों ने इन छेद में कपड़े फंसा रखे है, ताकि सर्द हवा नहीं आए। इसके अलावा वार्डों में लगे पलंगों पर न तो पर्याप्त बेडसीट है और न ही मरीजों के लिए कंबल। मरीज अस्पताल में भर्ती होता है वह अपने साथ सर्दी से बचने के लिए गांव से कंबल लेकर पहुंच रहा है। वार्डों में बने बाथरूम में गंदगी इतनी है कि वहां खड़ा रहना भी मुश्किल हो रहा है। जिले के सबसे बड़े अस्पताल में अव्यवस्थाएं, जिम्मेदार नहीं दे रहे ध्यान, मरीज परेशान जिला अस्पताल में सफाई व्यवस्था मानो जैसे भगवान भरोसे ही है। अस्पताल में प्रसव वार्ड, महिला वार्ड में बने शौचालय की लंबे समय से सफाई नहीं हो रही है। जिसके कारण पूरा शौचालय गंदगी से भरा पड़ा है। नवजात शिशु के साथ महिलाओं को इसी वार्ड में भर्ती किया जा रहा है, लेकिन वार्ड में बने शौचालय की सफाई नहीं होने के कारण पूरे वार्ड में बदबू फेल रही है। अस्पताल में भर्ती मरीजों को सर्दी से राहत पहुंचाने के लिए मरीजों के बैड पर चद्दर के साथ साथ कंबल भी देने का प्रावधान है, ताकि सर्दी में मरीजों को परेशानी नहीं हो। हाल ये है कि वार्डों में लगे कई बेड पर चद्दर नहीं है तो वार्ड में भर्ती मरीजों को गर्म कंबल उपलब्ध नहीं करवाई जा रही। ऐसे में वार्ड में भर्ती होने वाली महिलाओं के परिजन सर्दी से बचने के लिए अपने घर से ही गर्म कंबल लेकर आ रहे हैं। मरीजों के परिजन का कहना है कि भर्ती मरीजों को सर्दी से बचाने के लिए अस्पताल प्रशासन द्वारा कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। ऐसे में मरीजों के परिजन अपने साथ चद्दर और गर्म कंबल लेकर ही अस्पताल पहुंचते हैं। खिड़कियों पर लगाए पर्दे, लेकिन वो भी कटे-फटे एमसीएच सेंटर की दूसरी मंजिल में प्रसव वार्ड में प्रसव के बाद ​महिला और नवजात शिशुओं को भर्ती किया जाता है। वार्ड में बनी खिड़कियों के कांच टूट चुके हैं। साथ ही ​खिड़कियों पर लगी जालियों में भी बड़े-बड़े छेद हो गए हैं। रात होते ही इन खिड़कियों से आने वाली सर्द हवाओं के कारण वार्ड में बैठना भी मुश्कि​ल हो गया है। मरीजों को आने वाली परेशानी को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने इन टूटी खिड़कियों को ठीक नहीं करवाकर खिड़कियों पर पर्दे लगा दिए, लेकिन जो पर्दे लगाए है वो भी कटे-फटे हुए है। उनमें छेद हो रखे है। इन पर्दों से भी ठंडी हवाएं नहीं रुक रही। “अस्पताल के प्रसूती वार्ड में लगी खिड़कियों के कांच पूरी तरह से टूटे हुए हैं। रात में ठंडी हवाओं के कारण बैठना भी मुश्किल हो जाता है। खिड़कियों में लगी जाली भी टूटी हुई है, जिसमें कपड़े फंसा कर हवा को रोक रहे हैं। अस्पताल प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है।” – बाबूराम बलाऊ, परिजन “जिला अस्पताल के सभी वार्डों के अटेंडेंट को वार्डों में सुविधा को लेकर पाबंद किया गया है। साथ ही वार्ड में साफ सफाई पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अगर इसके बाद भी वार्डों में गंदगी रहती है तो उसे सुचारु किया जाएगा। खिड़कियों में टूटे कांच को भी जल्द ही सही करवा कर मरीजों को सर्दी से राहत पहुंचाएंगे।” -बी.एल. मसूरिया, पीएमओ, जिला अस्पताल बाड़मेर ।

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