झारखंड के 24 में से 19 जिले नक्सल फ्री:चाईबासा के जंगल में हैं माओवादियों के बड़े नेता, एक साल में नक्सल मुक्त होगा राज्य

झारखंड देश के उन पांच राज्यों में शामिल हैं, जहां अब भी नक्सली एक्टिव हैं। इनमें से पश्चिमी सिंहभूम जिले का मुख्यालय चाईबासा उन 12 जिलों की लिस्ट में है, जो सबसे अधिक नक्सल प्रभावित है। विभिन्न खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के मुताबिक चाईबासा के जंगलों में माओवादियों के पोलित ब्यूरो, सेंट्रल कमेटी और बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी के बड़े नक्सली डेरा जमाए बैठे हैं। इन नक्सलियों की सफाई करते हुए राज्य को अगले एक साल में नक्सल मुक्त बनाने का टारगेट झारखंड पुलिस को मिला है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से यह जिम्मेदारी राज्य पुलिस को सौंपी गई है। बीते साल नेशनल सिक्यूरिटी काउंसिल की बैठक में नक्सल प्रभावित राज्यों को नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया था। उसी कड़ी में राज्य सरकार को यह निर्देश मिला है। कोल्हान बना है नक्सलियों का सेफ जोन झारखंड में कोल्हान का एरिया माओवादियों-नक्सलियों के लिए सेफ जोन बना हुआ है। यहां झारखंड पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र बल के जवान दो साल से अधिक समय से नक्सलियों को खत्म करने को लेकर अभियान चला रहे हैं। आए दिन इस क्षेत्र में पुलिस बलों को सफलता मिल रही है फिर भी चाईबासा के जंगलों में डेरा जमाए माओवादियों के बड़े नेताओं तक अभी नहीं पहुंच सके हैं। रिपोर्ट के मुताबिक चाईबासा के बाबूडेरा इलाके में माओवादियों के शीर्ष 40 से 50 लीडर्स छिपे बैठे हैं। इनमें पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा, सेंट्रल कमेटी नक्सली अनल और असीम मंडल, बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी मेंबर सुशांत, अजय महतो, अमित हांसदा और अपटन जैसे शीर्ष नक्सली शामिल हैं। राज्य में एक्टिव हैं कई नक्सली संगठन राज्य में केवल माओवादी नक्सली ही नहीं हैं। यहां अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नक्सली संगठन एक्टिव हैं। हालांकि अधिकांश संगठनों का प्रभाव लगभग खत्म हो गया है। राज्य में माओवादियों के अलावा टीपीसी, जेजेएमपी, टीएसपीसी जैसे संगठन एक्टिव रहे हैं। इनमें से टीपीसी, टीएसपीसी और जेजेएमपी जैसे संगठन माओवादी संगठन से निकले हुए लोगों को ही संगठन रहा है। ये संगठन गिरिडीह, गुमला, लोहरदगा, चतरा और लातेहार सहित राज्य के अलग-अलग जिलों में एक्टिव रहे हैं। राज्य के जिलों में नक्सली संगठनों का हाल झारखंड पुलिस की रिपोर्ट के मुताबिक गिरिडीह, गुमला, लातेहार, लोहरदगा और पश्चिमी सिंहभूम ही उन पांच जिलों की लिस्ट में हैं, जो नक्सल प्रभावित हैं। हालांकि इन जिलों में केवल पश्चिमी सिंहभूम जिला ही अति नक्सल प्रभावित है। गिरिडीह, गुमला, लोहरदगा और लातेहार में नक्सली कमजोर हुए हैं। इन जिलों को डिस्ट्रिक्ट ऑफ कन्सर्न की श्रेणी में रखा गया है। सरायकेला-खरसावां, चतरा, खूंटी, रांची, बोकारो और गढ़वा वैसे जिले हैं, जहां नक्सलियों के खत्म होने की बात पुलिस कहती है। आंकड़ों में देखें पुलिस को मिली सफलता पुलिस मुख्यालय की ओर से मिली रिपोर्ट के मुताबिक बीते एक साल में नक्सलियों को खत्म करने या उन्हें नियंत्रित करने में पुलिस को सफलता हाथ लगी है। बीते एक साल में 244 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है। जिसमें एक सैक सदस्य, दो जोनल कमांडर, 6 सब जोनल कमांडर और 06 एरिया कमांडर रैंक के नक्सली हैं। वहीं 24 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण भी किया है। जिसमें 04 जोनल कमांडर , 01 सब जोनल कमांडर, 03 एरिया कमांडर और 01 सदस्य है। इसके सात से अधिक बड़े नक्सलियों को एन्काउंटर में मार गिराया गया है।

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