जोधपुर सेंट्रल जेल का कैदी नंबर-130 यानि आसाराम 11 साल बाद जेल से बाहर आ चुका है। उसे रेप के मामले में 31 मार्च तक अंतरिम जमानत मिली है। फिलहाल आसाराम अपने जोधपुर स्थित आश्रम में है। आसाराम समर्पण की आड़ में लड़कियों से रेप करता था। उसका घिनौना चेहरा सबसे पहले 2013 में सामने आया था, जब नाबालिग उसकी हैवानियत का शिकार हुई थी। इसके बाद पुलिस 31 अगस्त 2013 को आसाराम को इंदौर से गिरफ्तार कर जोधपुर लेकर आई थी। जोधपुर पुलिस ने आसाराम के सेवादार रहे लोगों का बयान लिया था, जिसे कोर्ट में पेश चार्जशीट में शामिल किया। इस चार्जशीट में शामिल बयानों को खंगाला गया तो इस केस से जुड़ी कई हैरान कर देने वाली जानकारी सामने आई, जिसका खुलासा आश्रम के ही सेवादारों और अनुयायियों ने किया। आसाराम के किस अनुयायी ने अपने बयान में क्या बताया पढ़िए ये खास रिपोर्ट… महेंद्रसिंह चावला (पूर्व सेवादार): गुरु के लिए तन-मन-धन समर्पित करने को कहते थे
2001 से नारायण साईं ने मुझे अपने साथ रखना शुरू कर दिया। इसके बाद मैंने कई बार नारायण साईं को लड़कियों के साथ आपत्तिजनक हालत में देखा। धीरे-धीरे मुझे आसाराम की भी असलियत पता चल गई। मुझे पता लगा कि आश्रम में ही काम करने वाली सेविकाएं ढेल और बंगलो किस तरह आसाराम के इशारे पर लड़कियों को उसके प्रति समर्पित करने के लिए उनका ब्रेन वॉश करती थी और बाद में उन लड़कियों को आसाराम के पास भेजती थी। आसाराम के प्रभाव के कारण ऐसी किसी भी पीड़ित की आवाज दबा दी जाती थी। अंबाला में दो लड़कियों ने शिकायत की तो उनके खिलाफ आसाराम के समर्थकों ने विरोध-प्रदर्शन कर रैलियां निकालीं। आसाराम के आश्रम में जब भी कोई नई लड़की आती तो उसे गुरु गीता और गुरु भक्ति योग जैसी पुस्तकें पढ़ने के लिए दी जाती, इनमें अपना सर्वस्व तनमन-धन गुरु को समर्पित करने को कहा जाता। 1993 में आसाराम का सेवक अजय : बाघ की खाल पर साधना
यह वर्ष 1994 की बात है। गर्मियों का मौसम था। एक बार राजस्थान के नंबर की एक गाड़ी आसाराम बापू के आश्रम से कुछ दूरी पर गऊशाला के पास आकर रुकी। नारायण साईं हमें साथ लेकर वहां गया। उस गाड़ी में दो जने बैठे थे। एक जने ने नारायण साईं को बैग दिया। बाद में मुझे नारायण साईं ने दिखाया कि इसमें बाघ की चार खाल हैं। नारायण ने हमें बताया कि इन पर बैठकर जाप करने से सिद्धि बहुत जल्दी प्राप्त होती है। आसाराम बोले- मैं ब्रह्मज्ञानी, मुझे पाप नहीं लगता
आश्रम में रहते हुए मैंने कुटिया में आसाराम को एक लड़की के साथ आपत्तिजनक हालत में देखा। एक दिन मैंने आसाराम को पत्र लिखा कि आप इन लड़कियों के साथ ऐसी हरकतें क्यों करते हो, लेकिन आसाराम की ओर से कोई जवाब नहीं आया। दोबारा लिखे गए पत्र पर भी कोई जवाब नहीं मिला तो मैं एक दिन जबरन आसाराम की कुटिया में गया और इस बारे में पूछा। इसके जवाब में आसाराम ने कहा कि ब्रह्मज्ञानी को यह सब करने से पाप नहीं लगता। बाद में उसने गार्ड से कहकर मुझे बाहर निकाल दिया। आश्रम के नियम न मौत का गम, न शोकसभा
आश्रम में सेवा करने वाले किसी भी शख्स की मौत हो जाने के बाद भी उस बारे में किसी को कोई चर्चा करने की इजाजत नहीं थी। मौत पर न तो कोई शोकसभा या श्रद्धांजलि सभा होती थी और ना ही मातम मनाने की व्यवस्था थी। आश्रम में नरेश नाम का व्यक्ति काम करता था, उसे आसाराम सीआईडी उपनाम से बुलाता था। वह आसाराम के बारे में सब कुछ जान चुका था। बाद में उसकी हरिद्वार में संदिग्ध परिस्थतियों में मौत हो गई। उसे आसाराम के ड्राइवर ने जीतू बाबल व अन्य सेवादारों के साथ मिलकर गंगा में डूबो कर मार दिया। इसी तरह, आश्रम का एक अन्य सेवादार रेवा भाई भी अचानक गायब हो गया। करीब एक महीने बाद यह बात फैला दी गई कि रेवा भाई का एक्सिडेंट हो गया। ऐसे ही अमर भाई के साथ भी हुआ।(पुलिस में दिए गए सचान के बयान) अजय कुमार और अन्य के बयान के अंश: आसाराम को संतुष्ट करने की ट्रेनिंग
आसाराम की ओर से जिस लड़की पर भी टॉर्च की रोशनी डाली जाती, ढेल, बंगलो और ढसा उस लड़की के बारे में जानकारी हासिल करती। फिर वे उसके घर पहुंचकर परिवार वालों को प्रभावित करके आसाराम का सत्संग करवाने के लिए प्रेरित करती थी। धीरे-धीरे उस परिवार को प्रभाव में लेकर लड़की को समर्पित करवाने का प्रयास करती थी। इस दौरान तीनों अलग-अलग तरीके से लड़की को आसाराम के प्रति समर्पित होने और उसके साथ रहने के लिए कई हथकंडे अपनाती थी। ये लड़की से कहती कि बापू तुम्हारे साथ ……. भी करता है तो तुम बहुत सौभाग्यशाली हो। जब आसाराम किसी लड़की से संतुष्ट नहीं होता था तो वह ढेल व बंगलो को गंदी गालियां तक देने से नहीं चूकता था। अब पढ़िए, जोधपुर में आसाराम ने जिस नाबालिग का रेप किया, उसके बयान…


