गिरिडीह में मकर संक्रांति के अवसर पर बराकर नदी के तट पर ऐतिहासिक खिचड़ी मेले का आयोजन किया गया। हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने दूर-दूर से पहुंचकर इस पावन अवसर पर हिस्सा लिया। मेले में लोगों ने परंपरागत रूप से मिट्टी के बर्तनों में खिचड़ी बनाई और परिवार के साथ भोजन का आनंद लिया। मेले का है रोचक इतिहास इस मेले का एक रोचक इतिहास है। कहा जाता है कि राजतंत्र काल में जब पालगंज राज्य में हैजा फैला, तब राजा ने बराकर नदी के तट पर स्थित चंपानगर में अपनी उप राजधानी स्थापित की थी। तभी से यहां मकर संक्रांति पर यह मेला लगता आ रहा है। नदी में स्नान के बाद शिव मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं प्रत्येक वर्ष 15 जनवरी को आयोजित होने वाले इस मेले में श्रद्धालु सबसे पहले बराकर नदी में स्नान करते हैं, जिसे वे गंगा के समान पवित्र मानते हैं। इसके बाद नदी तट पर स्थित शिव मंदिर में पूजा-अर्चना करते हैं। मेले की खास परंपरा के अनुसार लोग मिट्टी के बर्तनों में खिचड़ी बनाते हैं और परिवार के साथ पिकनिक के रूप में इसका आनंद लेते हैं। यह मेला स्थानीय संस्कृति और परंपरा का प्रतीक है, जो आस्था और विश्वास को मजबूत करने के साथ-साथ सामाजिक एकजुटता को भी बढ़ावा देता है। इस वर्ष भी मेले में उमड़ी भीड़ ने इस परंपरा की निरंतरता को बनाए रखा है।


