कैंसर तो बाद में मारेगा, सिस्टम उससे पहले मार देगा:कड़ाके की ठंड में रिम्स में फर्श पर हो रहा कैंसर मरीजों का इलाज

झारखंड में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। पारा 1.7 डिग्री तक पहुंच गया है। लेकिन राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स में कैंसर मरीज बीमारी से ज्यादा सिस्टम से लड़ रहे हैं। राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। लेकिन रिम्स में जमीनी हकीकत उतनी ही भयावह है। वहां इस कंपकंपाती ठंड में मरीज वार्ड के बाहर फर्श पर पड़े हैं, क्योंकि बेड ही उपलब्ध नहीं है। कई मरीज तो अस्पताल भवन के बाहर दहलीज पर रात गुजारने को मजबूर हैं। इन्हें न पर्याप्त दवा मिल रही है और न ही पर्याप्त डॉक्टर हैं। हालात ऐसे हैं कि इन मरीजों को कैंसर तो बाद में मारेगी, सिस्टम पहले मार देगा। हालांकि आंकोलॉजी बिल्डिंग में कैंसर मरीजों के लिए 54 वार्ड हैं। लेकिन सभी भरे हुए हैं। नए मरीजों के लिए कोई जगह नहीं है। कैंसर विभाग में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भी भारी कमी है। यह सिर्फ चार डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है। यहां वर्तमान में दो ऑन्कोसर्जन और दो रेडिएशन ऑंकोलॉजिस्ट कार्यरत हैं। हैरानी की बात यह है कि यह कैंसर का एक भी फिजिशियन नहीं है। ऐसे में यहां मरीजों का पूरा इलाज कैसे संभव है, यह सोचने वाली बात हैं। रिम्स में यह हाल सिर्फ कैंसर विभाग की ही नहीं है। अन्य विभागों में भी मरीजों का फर्श पर इलाज चल रहा है। कुछ विभाग तो ऐसे हैं, जहां सालभर फर्श पर मरीजों का इलाज किया जाता है। लेकिन कोई देखने वाला नहीं है। दो केस स्टडी से समझिए…कैसे सिस्टम से लड़ रहे कैंसर मरीज जामताड़ा का जादू रव्वानी…नाक में लगी है ट्यूब, फर्श पर बिस्तर स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी के क्षेत्र जामताड़ा के 35 वर्षीय जादू रव्वानी मुंह के कैंसर से पीड़ित हैं। पिछले कई दिनों से कैंसर विभाग में उनका इलाज चल रहा है। लेकिन उन्हें बेड नसीब नहीं हुआ है। उनके नाक में रॉयल्स ट्यूब लगी है और वार्ड के बाहर फर्श पर बिस्तर लगाकर पड़े हैं। धनबाद का विश्वनाथ : बेड खाली नहीं कहकर लौटाया, अब जमीन ही सहारा
धनबाद के 55 वर्षीय विश्वनाथ बाउरी मुंह के कैंसर से पीड़ित हैं। इलाज के शुरुआती दिनों में उन्हें बेड मिला, ऑपरेशन हुआ। लेकिन बाद में बेड से हटा दिया गया। गुरुवार को रेडियोथैरेपी होनी थी, तो इसलिए टाल दिया गया कि रेडिएशन आंकोलॉजी में बेड खाली नही हैं। अब जमीन ही सहारा है। वह सब कुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है इमरजेंसी शुरू करने की मंजूरी, पर कुछ नहीं हुआ एक साल पहले रिम्स शासी परिषद की बैठक में कैंसर विभाग में इमरजेंसी सेवा शुरू करने और बेड बढ़ाने की स्वीकृति दी गई थी। उद्देश्य था कि गंभीर मरीजों को तुरंत इलाज मिल संख्या। लेकिन अब तक न तो इमरजेंसी सेवा शुरू हुई और न ही बेड बढ़े। आंकोलॉजी विभाग के क्या हैं हालात आंकोलॉजी की चार ​मंजिला बिल्डिंग में कैंसर मरीजों के लिए 54 बेड हैं। लेकिन सभी बेड भरे हुए हैं। ऐसे में नए मरीजों को यहां बेड मिलना काफी मुश्किल है। उधर, मरीज की सेहत में थोड़ा सुधार आते ही बाहर कर दिया जाता है। इससे फर्श पर इलाज के अलावा उनके पास कोई रास्ता नहीं है। इधर, स्वास्थ्य ​सुविधाएं बढ़ाने के बड़े-बड़े दावे झारखंड सरकार राज्य में मेडिकल कॉलेज, मेडिकल यूनिवर्सिटी और अत्याधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के बड़े-बड़े दावे कर रही है। दूसरी तरफ रिम्स में कैंसर जैसे गंभीर रोग के मरीजों को फर्श पर सुलाने को मजबूर है। सीधी बात- अजय कु. सिंह, अपर मुख्य सचिव, स्वास्थ्य कैंसर मरीज को बेड नहीं मिल रहा, फर्श पर इलाज करा रहे हैं, ऐसा क्यों? -कैंसर विभाग के लिए सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। जल्दी ही करोड़ों रुपए की मशीनें खरीदने की योजना है। जहां तक मरीजों की परेशानी की बात है तो इसकी समीक्षा की जाएगी और सुविधाएं बेहतर की जाएंगी। इमरजेंसी शुरू करनी थी, उसका क्या हुआ? -जीबी में स्वीकृति मिल चुकी है, लेकिन यह अब तक लागू क्यों नहीं हुआ, इस पर जीबी में ही समीक्षा की जाएगी। फैकल्टी की नियुक्ति की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। इसके बाद बेड भी बढ़ाए जाएंगे

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