रांची जिले में 396 नवनियुक्त सहायक आचार्यों का पदस्थापन क्वालिटी एजुकेशन शिक्षा सुधार के नाम पर किया गया था। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यही पदस्थापन अब दर्जनों महिला और दिव्यांग शिक्षकों के लिए रोज का संघर्ष बन गया है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा तय एसओपी को पूरी तरह नजरअंदाज कर पोस्टिंग की गई है। आवास से स्कूल की न दूरी देखी गई, न रास्ता, न सुरक्षा और न पारिवारिक परिस्थिति। महिला शिक्षकों को ऐसे स्कूलों में भेजा गया है, जहां पहुंचने के लिए आखिरी वाहन से 8 से 10 किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। रास्ता जंगल, पहाड़ी और सुनसान इलाकों से होकर गुजरता है। इसके बावजूद जिला शिक्षा अधीक्षक का जवाब सिर्फ एक है- पहले योगदान करो, बाद में देखेंगे। शुक्रवार को बड़ी संख्या में प्रभावित शिक्षक जिला शिक्षा कार्यालय पहुंचे थे। हाथों में नियुक्ति पत्र, आंखों में आंसू और सवाल सिर्फ एक- पदस्थापन प्रताड़ित करने के लिए किया जाता है? महिला शिक्षक अपनी समस्या बताते-बताते रो पड़ीं। कई ने कहा कि रोज इतनी दूरी तय कर स्कूल पहुंचना मुश्किल है। नवनियुक्त शिक्षकों ने कहा कि एसओपी सिर्फ कागज में जिंदा है। महिला शिक्षकों और दिव्यांगों को गृह प्रखंड या नजदीकी क्षेत्र में पदस्थापन दिया जाए। लेकिन दिव्यांग शिक्षक को दूर के स्कूलों में पदस्थापित कर दिया गया है।


