शुभेंदु शुक्ला | अमृतसर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट के टेंडर की गड़बड़ी की जिस जांच में फेवर करवाने के एसएसपी विजिलेंस लखबीर सिंह पर आरोप लगे हैं, उसकी रिपोर्ट पूरी कर डीसी दलविंदरजीत सिंह ने चीफ सेक्रेटरी को भेज दी है। हालांकि रिपोर्ट में किसे गलत ठहराया गया और किसे सही यह अधिकारी बताने से बच रहे हैं। दूसरी तरफ ट्रस्ट का कहना है कि सीगल कंपनी ने इलेक्ट्रिकल वर्क का प्रमाण पत्र नहीं दिया था। जबकि सीगल कंपनी का तर्क है कि दस्तावेज मांगे बिना ही उन्हें टेंडर से बाहर कर दिया गया। 52.40 करोड़ रुपए का यह टेंडर रणजीत एवेन्यू (ब्लॉक-सी) और 97 एकड़ स्कीम के डवलपमेंट से जुड़ा है। 18 दिसंबर को इसकी फाइनेंशियल बिड ओपन हुई थी, जिसमें शर्मा कान्ट्रैक्टर ने 1.08% कम रेट (लेस) देकर H-1 बिडर बनकर बढ़त ली। राजिंदर इन्फ्रास्ट्रक्चर ने 0.25% लेस दी, इसलिए वह नंबर-1 पर नहीं आ पाई। वहीं सीगल इंडिया लिमिटेड और गणेश कार्तिकेय कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को डॉक्यूमेंट्स पूरे न होने और टेक्निकल खामियों के कारण फाइनेंशियल स्टेज से पहले ही आउट कर दिया गया। इसके बाद सीगल इंडिया ने चीफ सेक्रेटरी को शिकायत भेज दी, यहीं से पूरा मामला विवाद में आया और एसएसपी को सस्पेंशन झेलनी पड़ी। एसएसपी विजिलेंस के खिलाफ हुई कार्रवाई पर विधायक कुलदीप धालीवाल ने कहा कि हो सकता है लखबीर सिंह से कुछ चूक हुई हो। मुख्यमंत्री भगवंत मान की ओर से पहले भी इस तरह की कई कार्रवाई की गई हैं, ताकि प्रशासन को ईमानदार और पारदर्शी बनाया जा सके। फिलहाल उनके पास इस पूरे मामले की पूरी जानकारी नहीं पहुंची है और न ही यह स्पष्ट है कि इस मामले में किन-किन लोगों को नामजद किया गया है। पूरे केस की विस्तृत जानकारी लेने के बाद ही इस पर आगे अपनी बात रखेंगे। 17 अक्टूबर: पहला टेंडर निकला 23 अक्टूबर : रद्द 31 अक्टूबर: दूसरा टेंडर निकला 19 नवंबर: प्री-बिड मीटिंग, ठेकेदारों ने समय बढ़ाने की मांग की 2 दिसंबर: फाइनेंशियल बिड ओपन होनी थी, डेट आगे बढ़ी 18 दिसंबर: फाइनेंशियल बिड खुली। ट्रस्ट के अधिकारी देर रात तक फाइलों की चेकिंग। ट्रस्ट सूत्रों के अनुसार सभी को प्री-बिड के बाद 27 दिन का समय डॉक्यूमेंट पूरे करने के लिए दिया गया था। टेंडर रद्द होगा या नहीं, विभाग तय करेगा : डीसी ट्रस्ट का तर्क : सीगल इंडिया कंपनी ने 9 करोड़ के इलेक्ट्रिकल वर्क का सर्टिफिकेट अटैच नहीं किया। नियम के मुताबिक जरूरी डॉक्यूमेंट पहले से देने चाहिए थे। सीगल कंपनी का तर्क : नियम में 2 दिन का समय सुधार के लिए मिलता है, ट्रस्ट डॉक्यूमेंट मंगवा सकता था। सीधे बाहर करना सही नहीं था। यही पॉइंट डिस्प्यूट की बड़ी वजह बना। अलॉटमेंट के बाद 5 महीने में करने होंगे यह काम टेंंडर अलॉट होने के बाद 97 एकड़ और सी ब्लॉक एरिया में स्टॉर्म सीवर, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, स्ट्रीट लाइटिंग, हॉर्टिकल्चर, सिविल और रोड वर्क, टाइल्स, पार्किंग रेनोवेशन और सीवरेज सुधार का काम 5 माह में करना जरूरी होगा। करीब 4 साल पहले इम्प्रूवमेंट ट्रस्ट के पूर्व चेयरमैन दिनेश बस्सी के समय इसी काम के लिए 37 करोड़ का टेंडर निकला था, लेकिन बाद में चेयरमैन दमनदीप सिंह उप्पल के समय फंड की कमी बताकर टेंडर रद्द कर दिया गया। अब उसी प्रोजेक्ट में 15 करोड़ रुपए बढ़ाकर 52.40 करोड़ का नया टेंडर लगाया गया। पहले टेंडर में एडजस्ट कर दोबारा निकालने की वजह साफ नहीं बताई गई, इसी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दूसरा टेंडर की कॉस्ट 50 करोड़ से ऊपर पहुंच गई, जिससे शहर के ज्यादातर ठेकेदार टेंडर भरने की दौड़ से बाहर हो गए। शर्मा कांट्रेक्टर्स इसके लिए एलिजिबल था। 97 एकड़ स्कीम की सड़कें खस्ताहाल हो चुकी हैं। ^ जांच रिपोर्ट हैड ऑफिस भेज दी है। रिपोर्ट में क्या है, यह बताना संभव नहीं। टेंडर कैंसिल होगा या जारी रहेगा, इसका फैसला लोकल बॉडीज विभाग के अधिकारियों को करना है। – दलविंदरजीत सिंह, डीसी


