स्वर्ण मंदिर दरबार साहिब अमृतसर से आए सिख पंथ के महान रागी भाई जलविंदर सिंह और उनके साथियों ने मीठी और सुरीली आवाज में श्री गुरु गोबिंद सिंह महाराज के प्रकाशोत्सव पर शबद गायन करते हुए उनके पांच गुणों सत्य, दया, संतोष, विनम्रता और आत्म अनुशासन का जिक्र किया। ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास रखते हुए हमेशा चढ़दी कला की स्थिति में रहने का उपदेश दिया। श्री गुरु सिंह सभा रांची द्वारा गुरु नानकपुरा पीपी कंपाउंड गुरुनानक स्कूल सभागार में शनिवार को गुरु गोबिंद सिंह महाराज का 359वां प्रकाशोत्सव मनाया गया। श्री गुरु ग्रंथ साहिब के सहज पाठ के भोग के बाद हजूरी रागी भाई मनप्रीत सिंह और उनके साथियों ने शबद गायन कर विशेष दीवान की शुरुआत की। रागी जलविंदर सिंह ने शबद गाकर कहा कि गुरु गोबिंद सिंह का जीवन और उपदेश हमें साहस, सामान्य, नि:स्वार्थ सेवा और धार्मिकता के मार्ग पर चलने का संदेश देता है। उनसे पहले गुरुद्वारा के हजूरी रागी भाई भरपूर सिंह और उनके साथियों ने तहीं परकाश हमारा भयो, पटना शहर विखे भव लयो… और शबद गायन कर गुरु महाराज को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। छोटे-छोटे बच्चों रणवीर सिंह, अर्श वीर सिंह, सोहन सिंह, अबीर सिंह, तेजवीर सिंह, अनंत सिंह, अमृत कौर, हरजस सिंह, वाणी कौर ने रश्मीत कौर के निर्देशन में गुरु महाराज द्वारा वीर रस में रचित वाणी देहू शिवा वर मोहे ईहै शुभ करमन ते कबौ न टरो… शबद गायन किया। दीवान का संचालन करते हुए श्री गुरु सिंह सभा के महासचिव गगनदीप सिंह सेठी ने संगत को प्रकाशोत्सव की बधाई दी और कहा कि उनकी शौर्य गाथाएं और उपदेश आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने उसे समय थे। अपने जीवन से उन्होंने सिखाया कि निडरता, समानता और सेवा ही सच्चा धर्म है। दीवान की समाप्ति पर लंगर में विभिन्न समुदायों के लोग शामिल हुए और पंगत में बैठकर लंगर ग्रहण किया। विशेष दीवान में रामप्रीत सिंह, ज्ञान सिंह, सुरजीत सिंह, प्रोफेसर हरमिंदर वीर सिंह, मलकीत सिंह, हरजीत सिंह, परमजीत सिंह टिंकू, कुलतर सिंह, गुरजीत सिंह, मोहन सिंह, कर्नल विजय सिंह, हरजीत सिंह कृपाल सिंह विशेष रूप से उपस्थित हुए। शाम में मेन रोड गुरुद्वारा में दीवान सजाया गया। गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी ज्ञानी विक्रम सिंह ने कहा कि श्री गुरु गोबिंद सिंह का आगमन मानवीय अधिकारों के लिए हुआ था। मानस की जात सभी एक को पहिचानबो … उनका गुरुपर्व सिर्फ एक ऐतिहासिक व्यक्ति का उत्सव नहीं, बल्कि उन मूल्यों पर आध्यात्मिक चिंतन का एक अवसर है, जो साहस, करुणा और अपने विश्वास में अटूट आस्था को बढ़ावा देता है। श्री गुरु गोबिंद सिंह के जीवन का मुख्य लक्ष्य धर्म, सत्य और न्याय की रक्षा करना और लोगों को अत्याचार के विरुद्ध खड़े होने के लिए प्रेरित करना था। श्री गुरु गोबिंद सिंह महाराज के प्रकाशोत्सव पर सजे विशेष दीवान में शबद गायन करते रागी भाई व उपस्थित श्रद्धालु।


