जालंधर | सम्मेलन में संतूर वादक पंडित अभय रुस्तम सोपोरी ने राग नंद में प्रस्तुति दी। जालंधरियों को कश्मीर के सूफियाना घराने की रंगत मिली। राग नंद में एक आध्यात्मिक गहराई रही। राग की शुद्धता को बरकरार रखकर सूफियाना अंदाज की “रूहानियत’ पिरोते रहे। शास्त्रीय गायन में अक्सर राग नंद और राग जोग को एक ही रूप में मान लिया जाता है, संतूर के माध्यम से पं. अभय रुस्तम सोपोरी ने दोनों में बड़ा अंतर खड़ा किया है। उनके साथ तबले पर उस्ताद अकरम खान ने संगत की है जबकि पखावज पर अंकित पारीख रहे। पं. अभय के पिता संतूर वादक पंडित भजन सोपोरी ने जो सोपोरी बाज शैली को विकसित किया था, उसका श्रोताओं को आनंद मिला। उनके गायन अंग की खासियत रही कि वह तार को छेड़ने के बाद उसकी गूंज के दौरान ही स्वर को खींचाव दे रहे थे, जिससे संतूर पर भी इंसान कंठ जैसा मीठापन आ रहा था। उन्होंने वक्र चाल यानी घुमावदार तरीके से प्रस्तुति को मनमोहक बनाया है। वह 25 साल बाद बाबा हरिवल्लभ संगीत सम्मेलन में प्रस्तुति दे रहे थे। उन्होंने 1 घंटा 15 मिनट प्रस्तुति दी। पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने भी संतूर संगीत का आनंद लिया।


