जालंधर | श्री देवी तालाब मंदिर के प्रांगण में आधी रात को शास्त्रीय संगीत के श्रोताओं ने पंडित रोनू मजूमदार तथा पंडित शशांक सुब्रह्मण्यम की बांसुरी पर जुगलबंदी का आनंद मिला। उन्होंने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत राज चारुकेशी के साथ की। यह ऐसा राज है जिसे कर्नाटक शैली से अपनाया गया है। इस प्राचीन काल से ही सुबह से आधी रात तक गया जाता रहा है। इस दौरान मृदंग पर अनिरुद्ध राज और तबला पर शुभ महाराज ने संगत की है। इन दोनों साजों की संगत बहुत ही खास तालमेल और मधुरता के साथ हुई। दोनों एक दूसरे के पूरक बन गए और बांसुरी के प्रभाव ने संगीत का अलग रंग प्रस्तुत किया।


