मैनपुरी से सपा सांसद डिंपल यादव का बुधवार को 47वां जन्मदिन है। इस मौके को सपा कार्यकर्ता अलग-अलग अंदाज में सेलिब्रेट कर रहे हैं। उन्हें बर्थडे की बधाई दे रहे हैं। बरेली में एक सपा नेता ने खून से 47 बार ‘संविधान जिंदाबाद’ लिखकर डिंपल यादव का जन्मदिन मनाया। कहा- डिंपल यादव संसद से लेकर सड़क पर महिलाओं की आवाज उठाने का काम करती हैं। हमने उन्हें अपने खून से ‘संविधान जिंदाबाद लिखकर तोहफा देने की कोशिश की है। जब से केंद्र में मोदी और प्रदेश में योगी सरकार आई, तब से संविधान खतरे में है। सपा नेता ने खून से पोस्टर पर लिखा- संविधान जिंदाबाद
सपा नेता संजीव सक्सेना प्रदेश कार्यकारिणी के विशेष आमंत्रित सदस्य हैं। आज उन्होंने पीलीभीत मार्ग स्थित अपने घर पर डिंपल यादव के जन्मदिन पर कार्यक्रम रखा था। घर के बाहर पोस्टर लगाया। उन्होंने पहले केक काटकर डिंपल यादव को जन्मदिन की बधाई दी। उसके बाद डॉक्टर से सीरिंज से अपने हाथ से खून निकलवाया। फिर उसी खून से घर के बाहर लगे पोस्टर पर 47 बार ‘संविधान जिंदाबाद’ लिखा। कहा- भाजपा संविधान बदलना चाहती है
इस मौके पर संजीव सक्सेना ने कहा- भाजपा लगातार संविधान पर हमला कर रही है। वह संविधान बदलना चाहती है। लेकिन, समाजवादी पार्टी कभी भी भाजपा के मंसूबों को कामयाब नहीं होने देगी। संविधान बचाने के लिए समाजवादी पार्टी लगातार आवाज उठाती रही है। आगे भी उठाती रहेगी। सपा के लिए मेरे खून की एक-एक बूंद न्योछावर
संजीव सक्सेना ने कहा- समाजवादी पार्टी के लिए हम अपने खून की एक-एक बूंद देने को तैयार हैं। हम आज अपनी नेता डिंपल यादव के 47वें जन्मदिन को महिला सशक्तिकरण, संविधान दिवस के रूप में मना रहे हैं। इस मौके पर मैं शपथ लेता हूं कि अपने खून की आखिरी बूंद तक संविधान की रक्षा के लिए संघर्ष करता रहूंगा। पीडीए की एकता और सफलता के लिए अपना तन-मन समर्पित कर दूंगा। अब बात यूपी के सबसे बड़े राजनीतिक घराने की बहू डिंपल यादव की
आज डिंपल यादव का जन्मदिन है, इसलिए बात उनकी होगी। उनके राजनीतिक करियर की होगी। आखिर कैसे राजनीति में एंट्री ली? पार्टी से कहां चूक हुई कि अखिलेश की जीती सीट पर चुनाव लड़ने उतरी और पहला ही चुनाव हार गईं। कैसे निर्विरोध सांसद चुन ली गईं? राजनीति में कितनी रुचि है? आइए सब कुछ जानते हैं… सबसे पहले डिंपल की यादव परिवार में एंट्री की कहानी जानते हैं। उसके पहले ये जरूरी तस्वीर देख लीजिए जहां पापा का ट्रांसफर होता वहां पहुंच जाती डिंपल
डिंपल यादव का परिवार उत्तराखंड के काशीपुर का था। उनके पिता आर्मी में थे इसलिए कभी पुणे में तो कभी बठिंडा के आर्मी स्कूल में पढ़ाई की। एक बार तो उन्होंने अंडमान निकोबार द्वीप में रहकर पढ़ाई की। ऐसा इसलिए, क्योंकि पिता कर्नल आरएस रावत का ट्रांसफर जहां भी होता बेटी उनके साथ वहीं चली जाती। साल 1995 में उन्होंने लखनऊ के आर्मी स्कूल से इंटर पास कर लिया। दोस्त के घर दिखी लड़की को दिल दे बैठे थे अखिलेश
कहानी 1996 की है। अखिलेश मैसूर से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरा करके वापस लखनऊ आ चुके थे। आगे पर्यावरण विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन की प्लानिंग थी लेकिन कहां से करना सही रहेगा, इसपर बात नहीं बन पा रही थी। एकदिन इन्हीं चीजों पर चर्चा करने वह लखनऊ कैंट में अपने एक दोस्त के घर पहुंचे। वहां एक बेहद शालीन लड़की दिखी। अखिलेश की नजर टिक गई। दोस्त से पूछा, “कौन है?” दोस्त ने बताया, “ये डिंपल सिंह रावत हैं। यहीं लखनऊ में पढ़ाई कर रही हैं।” अखिलेश और डिंपल की वहां थोड़ी सी बात हुई फिर दोस्ती हो गई। वक्त के साथ-साथ ये दोस्ती प्यार में बदल गई। अखिलेश से अपनी बेटी की शादी करना चाहते थे लालू यादव
पर्यावरण विज्ञान की पढ़ाई करके ऑस्ट्रेलिया से लौटे तो अखिलेश पर शादी का दबाव बढ़ने लगा। अखिलेश डिंपल के बारे में अपने पापा को बताने से डर रहे थे। वह किसी तीसरे व्यक्ति की तलाश में थे जो उनकी बात मुलायम सिंह के सामने रख सके। तभी उन्हें अपनी दादी की याद आई। दादी से डिंपल के बारे में बताया। दादी को लड़की पसंद आ गई। उन्होंने मुलायम को पूरी बात बताई। मुलायम थोड़े कन्फ्यूज हुए क्योंकि उनके पास लालू यादव की बेटी का भी रिश्ता था। मुलायम सिंह यहां बेटे के फैसले के साथ थे। उन्होंने लालू यादव की तरफ से आए रिश्ते को मना कर दिया और 24 नवंबर 1999 को अखिलेश और डिंपल की शादी करवा दी। पूरा परिवार राजनीतिक लेकिन डिंपल को राजनीति में रुचि नहीं
मुलायम सिंह का पूरा परिवार राजनीति में है। लेकिन डिंपल सिंह रावत को राजनीति में कोई रुचि नहीं थी। इसकी बड़ी वजह उनके पिता आरसी सिंह रावत का आर्मी बैकग्राउंड से होना था। उत्तराखंड के काशीपुर में स्थित उनके परिवार में कोई भी राजनीतिक बातें नहीं करता था। इसलिए डिंपल यादव को भी राजनीति में कोई रुचि नहीं रही। लेकिन जब वह प्रदेश के सबसे बड़े सियासी घराने की बहू बन गई तो उनका राजनीति में आना तय हो गया। 2009 में पहली बार चुनाव लड़ा और हार गई
शादी के 10 साल बाद डिंपल यादव ने 2009 में पहली बार चुनाव लड़ा। दरअसल अखिलेश ने कन्नौज और फिरोजाबाद से चुनाव लड़ा था और दोनों सीट पर जीत गए थे। फिरोजाबाद छोड़ा तो वहां उपचुनाव हुआ। सपा ने डिंपल यादव को उतारा। ये पहला मौका था जब डिंपल यादव प्रचार करने के लिए घर की चौखट से बाहर आई थी। सामने कांग्रेस के प्रत्याशी राजबब्बर थे। डिंपल यादव 85,343 वोट से अपना पहला ही चुनाव हार गईं। अखिलेश सीएम बने तो निर्विरोध चुनी गईं डिंपल
2012 में समाजवादी पार्टी ने विधानसभा चुनाव जीता। अखिलेश यादव 38 वर्ष की उम्र में प्रदेश के सीएम बने। उनकी कन्नौज सीट खाली हो गई। इस बार यहां से डिंपल यादव को उतारा गया। कांग्रेस, बीजेपी और बसपा ने उनके सामने अपने प्रत्याशी ही नहीं उतारे। संयुक्ता समाजवादी दल के दशरथ सिंह और शंखवार और निर्दलीय उतरे संजू कटियार ने भी अपना नामांकन वापस ले लिया। इस तरह से डिंपल यादव यूपी की पहली ऐसी महिला बनी जिन्होंने लोकसभा का चुनाव निर्दलीय जीता। 2014 में प्रचंड मोदी लहर के बीच जीत गई डिंपल
2014 में पूरे देश में नरेंद्र मोदी की प्रचंड लहर थी। डिंपल दोबारा कन्नौज से चुनाव मैदान में थी। सामने बीजेपी के सुब्रत पाठक थे। दोनों के बीच कड़ी टक्कर हुई लेकिन जीत डिंपल यादव के हिस्से में आई। डिंपल को 4 लाख 89 हजार 164 वोट मिला। सुब्रत को 4 लाख 69 हजार 257 वोट मिला। इस तरह से सपा 19,907 वोट से जीतने में सफल रही। 2019 में सुब्रत ने डिंपल से बदला ले लिया
2019 में कन्नौज की कहानी बदल गई। डिंपल यादव को पहले के मुकाबले ज्यादा वोट मिला लेकिन सुब्रत को उनसे भी ज्यादा मिला। नतीजा आया, “डिंपल यादव 12,353 वोट से हार गई।” इस तरह से सपा का गढ़ माना जाने वाला कन्नौज अब उसके हाथ से छूट चुका था। 2022 में ससुर की विरासत को बचाने में सफल रहीं मैनपुरी का उपचुनाव महज एक चुनाव नहीं, बल्कि मुलायम सिंह यादव की विरासत को बचाने की लड़ाई थी। उनकी मौत के बाद जो सबसे बड़े दावेदार बनकर उभरे उसमें शिवपाल यादव थे। धर्मेंद्र यादव और अक्षय यादव भी चाहते थे कि जिस सीट से राजनीति की शुरुआत की उस पर दोबारा मौका मिले। लेकिन, अखिलेश ने डिंपल यादव को उतारा और सीट जीत ली। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भी मैनपुरी से जीत दर्ज की। संसद में इकलौते पति-पत्नी हैं अखिलेश और डिंपल लोकसभा चुनाव में 37 सीटें जीतने के बाद समाजवादी पार्टी देश में तीसरे नंबर की पार्टी बन गई है। अखिलेश यादव कन्नौज सीट से सांसद हैं। वहीं, उनकी पत्नी डिंपल यादव मैनपुरी से सांसद हैं। इस तरह दोनों संसद में अकेले दंपती हैं। ———————— ये खबर भी पढ़िए… महिला टीचर को कुत्तों ने दौड़ाया, स्कूटी से गिरीं… मौत, पति बोले- हमें महाकुंभ नहाने जाना था अब अस्थियां लेकर जाएंगे कानपुर में स्कूटी से जा रही महिला टीचर को कुत्तों ने दौड़ा लिया। संतुलन बिगड़ने से योगा टीचर सड़क पर गिर गईं। हेलमेट छिटक कर दूर जा गिरा। सिर में गंभीर चोट लगने के कारण उनकी मौत हो गई। हादसा मंगलवार रात 8:30 बजे काकादेव क्षेत्र के नवीन नगर में हुआ। वहां मौजूद हॉस्टल के छात्र तत्काल अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने टीचर को मृत घोषित कर दिया। पढ़िए पूरी खबर


