झारखंड में रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (लैंड रिकॉर्ड) में जेंडर कॉलम भी होगा। लैंड रिकॉर्ड में स्वामित्व से जुड़ी जानकारी सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने झारखंड को यह कॉलम जोड़ने को कहा है। इस संबंध में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव कुणाल सत्यार्थी ने झारखंड के राजस्व निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव चंद्रशेखर को पत्र लिखा है। इसमें कहा है कि लैंड रिकॉर्ड में जेंडर कॉलम शामिल कर संबंधित आंकड़े डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी) के एमआईएस पोर्टल पर अपलोड करने की प्रक्रिया जल्द शुरू करें। पत्र में कहा गया है कि अभी भूमि स्वामित्व में महिलाओं की हिस्सेदारी सीमित है। जेंडर आधारित आंकड़े न होने से महिलाओं के भूमि अधिकारों की सटीक जानकारी नहीं मिल रही है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने लैंड रिकॉर्ड में जेंडर कॉलम जोड़ने को कहा, ताकि स्पष्ट हो सके कि जमीन का स्वामित्व पुरुष, महिला या संयुक्त रूप से किसके नाम है। लेकिन झारखंड में इसकी प्रक्रिया अभी शुरू ही नहीं हुई है। इसे गंभीरता से लेते हुए जरूरी कदम उठाने को कहा गया है। इससे सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, लाभार्थियों की पहचान और नीति निर्माण में सहायता मिलेगी। जमीन विवादों में भी कमी आई। गौरतलब है कि ओडिशा में लैंड रिकॉर्ड में जेंडर कॉलम जोड़ दिया गया है। वहीं त्रिपुरा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, कर्नाटक, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों में इस पर काम चल रहा है। जमीन के मालिकाना हक के लिए आरओआर जरूरी रिकॉर्ड ऑफ राइट्स (आरओआर) जमीन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण कानूनी दस्तावेज है। इसमे जमीन के मालिक का नाम, खाता-खसरा नंबर, जमीन का कुल रकबा, भूमि का प्रकार (कृषि, आवासीय या व्यावसायिक) का जिक्र होता है। जमीन किसके कब्जे में है और उस जमीन पर कोई लोन, बंधक या टैक्स तो नहीं है, इसके पहले का मालिक कौन था, इसकी जानकारी होती है। यह जमीन के मालिकाना हक को साबित करने, उसकी खरीद-बिक्री करने और लोन लेने के लिए जरूरी होता है।


