शहर में भट्टियां ट्रीटमेंट प्लांट से 5 किमी दूर कासाबाद के पास सतलुज नदी की दशा बेहद डराने वाली है। यहां सतलुज नदी कैमिकल वाली सफेद झाग से अटी पड़ी है। ये सफेद झाग उसी पानी में है, जो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से ट्रीट होकर निकल रहा है। यानी, ये पानी सरकारी कागजों में साफ हो चुका है, जबकि सच्चाई इससे बिलकुल उलट है। ये हालत तब है, जब नगर निगम ने 3 नए सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाने और तीन पुराने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांटों को अपग्रेड करने पर कुल 650 करोड़ रुपए खर्च कर लिए हैं और 294 करोड़ रु. इनके ऑपरेशन और मेंटीनेंस के नाम पर खर्च के लिए रखे हैं। कुल मिलाकर 944 करोड़ रु. का प्रावधान होने के बावजूद काले पानी का सच नहीं बदला है। ये दूषित पानी सतलुज में मिलकर पंजाब और राजस्थान के सैंकड़ों गांवों की पेयजल लाइनों के जरिए घरों में पहुंच रहा है। सांसद व पर्यावरणविद् संत बलबीर सिंह सीचेवाल लुधियाना में कैंप लगाकर बैठे हैं। वे बुड्ढा दरिया को प्रदूषण मुक्त करने के लिए यहीं रहकर काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी तमाम कोशिशों पर प्रशासन के अफसर काला पानी फेर रहे हैं। सतलुज में गिरते कैमिकल युक्त गंदे पानी को लेकर पीपीसीबी के चीफ इंजीनियर आके रताड़ा कहते हैं- ये बात सही है कि डेयरियों की गंदगी बुड्ढा दरिया में गिर रही है। हम लोग इस पर लगातार सख्ती कर रहे हैं। करीब 50 टन गोबर हंबड़ा में भेजा गया है। 200 टन बायोगैस में इस्तेमाल हो रहा है। हमने कई फैक्ट्रियों को पकड़ा है, जो सीवरलाइन में अनट्रीटेड वेस्ट डाल रहे थे। रात में पीपीसीबी की टीम चेकिंग कर कार्रवाई कर रही है। अब छोटी इंडस्ट्रीज पर एक लाख रु. तक का जुर्माना लगाया जाएगा।’ इतने प्लांट बने, लेकिन दूषित पानी नहीं रुका… {जमालपुर में 225 एमएलडी का नया प्लांट बना है। {50 एमएलडी का भटि्टयां में नया प्लांट बनाया है। {105 एमएलडी का बलोके में नया प्लांट बनाया है। {111 एमएलडी के भटि्टयां वाले प्लांट को अपग्रेड किया। कार्रवाई: 28 फैक्ट्रियों के कनेक्शन काटे बुड्ढा दरिया व सतलुज में बढ़ते प्रदूषण पर राजस्थान और पंजाब के लोगों ने दिसंबर में आंदोलन किया था। इसके बाद लुधियाना में संत सीचेवाल अस्थाई पंपिंग स्टेशन का निर्माण करवा रहे हैं, जबकि निगम ने 170 डेयरियों को नोटिस जारी किए हैं। 13 डेयरियों पर मुकदमा दर्ज किया गया है। पीपीसीबी ने 28 फैक्ट्रियों को पकड़ा है, जिनके द्वारा सीवरलाइन में अनट्रीटेड वेस्ट डाला जा रहा था। इनके कनेक्शन काटे गए हैं। बैठक…आईआईटी विशेषज्ञों ने रखी राय बुड्ढा दरिया को प्रदूषण मुक्त करने को आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों ने विचार रखे हैं। इंडस्ट्रीज वेस्ट, सीवरेज आदि की गंदगी से बुड्ढा दरिया में प्रदूषण बढ़ा है जिससे सतलुज और पंजाब समेत राजस्थान की आबादी को नुकसान पहुंच रहा है। बुधवार को चंडीगढ़ में चीफ सेक्रेटरी केएपी के साथ आईआईटी रुड़की समेत अन्य विशेषज्ञों के साथ मीटिंग की गई। अफसरों ने आईआईटी विशेषज्ञों को प्रदूषण के कारणों के बारे में जानकारी दी। एक्सपर्ट व्यू…स्किन प्रॉब्लम हो सकती है पीएयू के एक्सपर्ट के अनुसार एसटीपी से आने वाले पानी में फास्फेट ज्यादा होते हैं जिससे फ्रॉस्ट बनती है। इसके अलावा डाइंग के पानी में भी मौजूद कैमिकल भूवैज्ञानिक पदार्थों के साथ मिलते हैं जो फ्रॉस्ट का कारण बनते हैं। इस झागवाले पानी में अगर हाथ डालेंगे या इस पानी को छुआ जाएगा तो इनसे स्किन संबंधी समस्याएं होती हैं। सतलुज दरिया- प्लांट से निकलता झाग वाला काला पानी ये नाकामियों की झाग }ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाला पानी सतलुज को ऐसे दूषित कर रहा भट्टियां ट्रीटमेंट प्लांट से 5 किमी दूर कासाबाद में जब ये काला पानी सतलुज में मिलता है तो सफेद झाग बनाता है।


