आने वाले समय में प्रदेश में हरियाली बढ़ाना और आसान होगा। अब तक पौधों की उपलब्धता को लेकर वन विभाग के पास जिम्मा था। भविष्य में मनरेगा के तहत मजदूर पौधे तैयार करेंगे। इसके लिए प्रदेश में 11 हजार से ज्यादा पंचायतों में खुद की पौधशालाएं विकसित की जाएंगी। प्रत्येक पंचायत में कम से कम पांच हजार पौधे तैयार किए जाएंगे। आगामी मानसून के दौरान प्रदेश में करोड़ों पौधे लगाए जाएंगे। मानसून में पौधरोपण अभियानों में सभी विभागों को पौधे उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी वन विभाग के पास होती है। ऐसे में पर्याप्त संख्या में पौधे नहीं मिल पाते। अब ग्रामीण विकास एव पंचायतीराज विभाग की इस नई पहल से न केवल वन विभाग का भार कम होगा, बल्कि हर जगह पौधों की उपलब्धता आसान हो जाएगी। यही नहीं, सरकारी अभियानों में पौधे लगाने के साथ ग्रामीणों को भी आसानी से पौधे मिल जाएंगे। हाल ही में पूरे प्रदेश में पौधशालाओं के शिलान्यास हो चुके हैळं। योजना के क्रियान्वयन के लिए विभिन्न स्तरों पर नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की गई है। ग्राम स्तर पर ग्राम विकास अधिकारी, ब्लॉक स्तर पर सहायक अभियंता, जिला स्तर पर अधिशासी अभियंता इसकी मॉनीटरिंग करेंगे। इसमें भामाशाह भी मदद कर सकेंगे। एक साल में ही तैयार हो जाएंगे कई किस्मों के 55 करोड़ पौधे एक पंचायत के 5000 पौधों के लक्ष्य के अनुसार प्रदेश में 55 करोड़ों पौधे तैयार हो सकेंगे। बीज बैंक की भी स्थापना की जाएगी। सरकार ने अगले पांच वर्षों में 50 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। इससे प्रदेश में हरियाली बढ़ेगी। नर्सरी विकास कार्य न्यूनतम 3 साल के लिए स्वीकृत किए जाने का प्रावधान रखा गया है। सुरक्षा के लिए चौकीदार की भी व्यवस्था होगी। इसमें मनरेगा मजदूर तैनात किया जाएगा। पंचायत कार्यालय के आसपास ही इसे बनाएंगे ताकि देखरेख आसान हो। जहां पुराने भवनों के परिसर नहीं हैं तो वहां वायर फेसिंग से सुरक्षा दीवार बनाई जाएगी। सबसे ज्यादा उदयपुर में 491, जयपुर में 446 (दूदू को छोड़कर) , जोधपुर में 411, बाड़मेर में 422, बांसवाड़ा में 417, डूंगरपुर में 353, चूरू में 304, दौसा में 279, डीडवाना कुचामन में 236, बीकानेर में 380, अलवर में 294 पौधशालाएं विकसित की जाएंगी। काम नहीं आ रहे पुराने भवनों में बनाई जाएगी पौधशालाएं जिला परिषदों ने पौधशालाओं के लिए सभी जिलों में जगहों का चयन कर लिया है। इसमें ऐसे भवनों के परिसर को भी देखा गया है कि जो काम नहीं आ रहे हैं। मगर वहां सुरक्षित चारदीवारी और पानी की सुविधा है। यहां मनरेगा के तहत पौधे तैयार करने के लिए मस्टररोल जारी होंगे। इसी काम के लिए मेट भी नियुक्त होंगे। मजदूर भी काम करेंगे। सबसे पहले वे क्यारियां तैयार करेंगे। 15 फरवरी तक थैलियों में बीज उगाने का कार्यक्रम तय किया।


