अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ एकीकृत के बैनर तले चल रहा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का अनिश्चितकालीन धरना आठवें दिन भी जारी रहा। बुधवार को महिलाओं ने सरकार को सद्बुद्धि देने के लिए महिला एवं बाल विकास निदेशालय के सामने सद्बुद्धि हवन किया। इसमें अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ एकीकृत के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने भी आहुतियां दीं। गुरुवार को महिलाएं महिला बाल विकास मंत्री व डिप्टी सीएम दिया कुमारी के आवास का घेराव करेंगी। इससे पूर्व, प्रदर्शनकारी आंगनबाड़ी महिला कार्यकर्ताओं ने सूखी रोटी, हरी मिर्च और मूली से खाकर काली संक्रांति मनाई। महिला कार्मिकों की ये हैं मुख्य मांगें 1. आंगनबाड़ी कर्मियों को नियमित किया जाएl आंगनबाड़ी कर्मियों की 3 श्रेणियां बनाई जाएं और श्रेणीवार मानदेय निर्धारित किया जाए। कर्मचारी वर्ग : प्रतिमाह वेतन : सेवा अर्धकुशल : 22568 : 2 वर्ष कुशल : 24804 : 2 से 5 वर्ष उच्च कुशल : 26910 : 5 से 10 वर्ष 2. विभाग में आंगनबाड़ी सुपरवाइजर के पद का कोटा 50 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से भरे जाएं। विभाग में मानदेय कर्मियों के लिए अन्य पद जैसे- चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, कनिष्ठ सहायक (लिपिक) के 50 प्रतिशत आरक्षित रखें। 3. पोषाहार वितरण के लिए लाभार्थी की फेस रीडिंग की जगह ओटीपी व्यवस्था को प्राथमिकता मिले। 4. बजट घोषणा अनुसार सेवानिवृत्ति पर 2 से 3 लाख रु. की राशि देने की व्यवस्था शीघ्र लागू की जाए। पेंशन व्यवस्था भी अतिशीघ्र लागू हो। 5. आंगनबाड़ी केंद्रों पर शिक्षा विभाग के कैलेंडर अनुसार अवकाश देय हो। धरने पर बैठे बच्चे, राष्ट्रीय खेलों में मलखंब टीम की भागीदारी पर संकट उत्तराखंड राष्ट्रीय खेलों में राजस्थान की मलखंब टीम की भागीदारी संकट में पड़ गई है। टीम चयन में राजस्थान ओलिंपिक संघ पर धांधली का आरोप लगाते हुए कोटा से आए मलखंब के नन्हे खिलाड़ी बुधवार को यहां सवाई मानसिंह स्टेडियम में कड़ाके की ठंड में धरने पर बैठे। शाम को खेल परिषद के सचिव राजेन्द्र सिंह सिसोदिया के दखल के बाद राजस्थान ओलिंपिक संघ ने 11 जनवरी को कराई अपनी ट्रायल को निरस्त करने की बात कही है। अब राष्ट्रीय खेलों में राजस्थान टीम के चयन का फैसला मलखंब फेडरेशन ऑफ इंडिया पर छोड़ा गया है। ओलिंपिक संघ की लापरवाही और चयन प्रक्रिया में गफलत से खिलाड़ियों का भविष्य अधर में है। मलखंब के राष्ट्रीय रेफरी और कोच कोटा के गोपाल सिसोदिया का कहना है कि राष्ट्रीय खेलों में एंट्री की समय सीमा निकलने के बाद अब खिलाड़ियों की भागीदारी पर प्रश्नचिन्ह लग गया है। ओलिंपिक संघ के अध्यक्ष तेजस्वी गहलोत ने इतनी देरी कर दी कि अब कुछ कहा नहीं जा सकता। कोच गोपाल ने खेल विभाग के सचिव भवानी सिंह देथा से भी बात की। उसके बाद ही परिषद सचिव स्टेडियम पहुंचे।


