नर्मदापुरम के सदर बाजार स्थित सेंट जॉर्ज चर्च में उस समय विवाद खड़ा हो गया, जब चर्च परिसर के शौचालय की खिड़की में हिंदू धर्म का पवित्र प्रतीक स्वास्तिक चिन्ह बना हुआ पाया गया। इस बात की जानकारी मिलते ही रविवार शाम करीब 5 बजे हिंदू संगठन और बजरंग दल के पदाधिकारी व कार्यकर्ता चर्च परिसर पहुंचे और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। करीब आधा घंटे तक विवाद चला। इसके बाद खिड़की पर लगे स्वास्तिक को तोड़ गया। चर्च में बिशप ने कहा यदि उन्हें पहले जानकारी होती तो वह खुद ही इसे खुद ही हटवा देते। हिंदू संगठनों ने बताया धर्म का अपमान
प्रदर्शन कर रहे हिंदू संगठनों के पदाधिकारियों ने कहा कि स्वास्तिक चिन्ह सनातन धर्म की आस्था और पहचान है। इसे घरों के मुख्य द्वार, मंदिरों और पूजन स्थलों पर बनाया जाता है। चर्च के शौचालय की खिड़की में स्वास्तिक चिन्ह बनाना हिंदू धर्म का अपमान है। उन्होंने मांग की कि ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई बहस
नारेबाजी और प्रदर्शन की सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची। एसआई विशाल नागवे और एएसआई संजय रघुवंशी पुलिस बल के साथ स्थिति संभालने में जुट गए। इस दौरान हिंदू संगठनों के लोगों ने स्वास्तिक चिन्ह दिखाते हुए उसे स्वयं तोड़ने की बात कही। एसआई विशाल नागवे ने स्पष्ट कहा कि किसी को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने सवाल किया कि क्या इस मामले की जानकारी पहले प्रशासन या चर्च प्रबंधन को दी गई थी। इसी बात को लेकर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ देर तक बहस भी हुई। 30 मिनट बाद हटाया गया स्वास्तिक चिन्ह
करीब आधे घंटे तक चले घटनाक्रम के बाद चर्च के सेवादार और एक युवक ने हथौड़ी की मदद से शौचालय की खिड़की पर बना स्वास्तिक चिन्ह तोड़कर हटा दिया। इसके बाद मामला शांत हुआ और प्रदर्शन समाप्त हो गया। हिंदू संगठनों का सवाल – प्रशासन कब लेगा संज्ञान
हिंदू संगठन के नितेश खंडेलवाल ने कहा कि सनातन धर्म का इस तरह अपमान कब तक सहन किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान नहीं लेता। धार्मिक स्थल के शौचालय में स्वास्तिक चिन्ह बनाना गंभीर मामला है और दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए। चर्च बिशप बोले- हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं
चर्च के बिशप संतोष सागर ने पूरे मामले पर सफाई देते हुए कहा कि शौचालय का निर्माण वर्ष 2022 से पहले किया गया था, जिसे पादरी इलियाजर मसीह ने बनवाया था, जिनका अब निधन हो चुका है। उन्होंने कहा कि वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और उन्हें इस चिन्ह की जानकारी पहले नहीं थी। बिशप के अनुसार, यदि उन्हें पहले जानकारी होती तो वे स्वयं इसे हटवा देते। सूचना मिलने पर वे इटारसी से लौटकर मौके पर पहुंचे और तत्काल चिन्ह हटवाया गया। फिलहाल शांत हुआ मामला
स्वास्तिक चिन्ह हटाए जाने के बाद पुलिस और प्रशासन की मौजूदगी में स्थिति सामान्य हो गई। हालांकि इस घटना ने धार्मिक संवेदनशीलता और प्रशासनिक सतर्कता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।


