राजगढ़ में गादीयालुहार गांव में भागवत कथा का भावुक समापन:अंतिम भजन पर रो पड़ीं कथावाचक, श्रद्धालुओं की आंखें भी नम हुईं

राजगढ़ जिले के गादीयालुहार गांव में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का रविवार को ऐसा समापन हुआ, जिसने पूरे पांडाल को भावुक कर दिया। कथा के अंतिम दिन ललितपुर से आई कथावाचक शिवि दीक्षित व्यास गादी पर बैठी-बैठी फूट-फूटकर रोने लगीं। यह आंसू किसी दुख के नहीं, बल्कि सात दिनों में मिले अपार प्रेम, अपनत्व और श्रद्धा के थे। जैसे ही शिवि दीक्षित ने अंतिम भजन “हम ललितपुर वासी अपने घर जा रहे हैं…” शुरू किया, उनकी आवाज भारी हो गई। भजन गाते-गाते वे खुद को रोक नहीं सकीं। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा, “कब सात दिन निकल गए, हमें खुद पता नहीं चला। हर शाम गांव की बहनें, बुजुर्ग, बच्चे हमारे पास आकर बैठते थे। इतना अपनापन, इतना प्रेम… यह आसानी से नहीं भुलाया जा सकता।” श्रद्धालुओं की आंखें भी नम हो गईं
इतना कहते ही शिवि दीक्षित के आंसू बह निकले और पांडाल में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं की आंखें भी नम हो गईं। कथा सुनने के लिए आसपास के गांवों से 5 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचे थे। भीड़ इतनी अधिक थी कि पांडाल छोटा पड़ गया और लोग बाहर तक बैठकर कथा सुनते नजर आए। कथा समापन पर राजगढ़ के भाजपा विधायक अमर सिंह यादव, कांग्रेस के पूर्व विधायक बापू सिंह तंवर सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद थे। समापन के बाद मंच से भाजपा विधायक अमर सिंह यादव ने गांव में मंदिर निर्माण के लिए 5 लाख रुपए देने की घोषणा की। उल्लेखनीय है कि यह श्रीमद्भागवत कथा 22 दिसंबर से 28 दिसंबर तक प्रतिदिन दोपहर 12 से 3 बजे तक चली। समापन के बाद पूर्णाहुति और भोजन प्रसादी का आयोजन हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता की। पूर्व विधायक बोले- फसल और घास जलाना महापाप है
इधर, कांग्रेस के पूर्व विधायक बापू सिंह तंवर ने कथा मंच से समाज को आइना दिखाने वाली बात कही। उन्होंने कहा कि समाज में जागरूकता का असर है कि मृत्यु भोज जैसी कुप्रथा अब लगभग समाप्त हो चुकी है, नहीं तो पहले लोग इस दिखावे में जमीन तक बेच देते थे। उन्होंने खेतों और घास में आग लगाने की घटनाओं को लेकर सख्त शब्दों में कहा, “फसल और घास जलाना महापाप है। जिस गोमाता की हम पूजा करते हैं, उसी की रोटी आप आग में झोंक देते हो। कोई हमारी रोटी छीन ले तो हमें कितना बुरा लगता है। यही काम आगजनी करने वाले कर रहे हैं।” उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं से समाज लुटता है, पुलिस लुटती है और पंचायतों में झगड़े बढ़ते हैं। बापू सिंह तंवर ने शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बताते हुए कहा कि शिक्षा ही ऐसा धन है, जिसे कोई छीन नहीं सकता। शिक्षित व्यक्ति ही सही खेती कर सकता है, सरकारी योजनाओं का लाभ ले सकता है और समाज को दिशा दे सकता है।

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