बुरहानपुर जिले में पांगरी बांध से प्रभावित तीन गांवों के किसानों ने रविवार को विरोध का ऐसा अनोखा तरीका अपनाया, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया। पांगरी, नागझिरी और बसाली गांवों के किसान उतावली नदी के किनारे एकत्र हुए और अपने सिर पर गेहूं, चना और मसूर के पौधे रखकर प्रदर्शन किया। किसानों ने इस प्रतीकात्मक आंदोलन को ‘सिर पर खेती’ नाम दिया। तीन साल से जारी है मुआवजे की लड़ाई
खकनार तहसील की पांगरी बांध परियोजना से प्रभावित किसान पिछले तीन वर्षों से लगातार आंदोलन कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण कानून के तहत उन्हें जो मुआवजा मिलना चाहिए था, वह अब तक नहीं दिया गया। कम मुआवजे में परिवार का पालन-पोषण संभव नहीं है। दोगुना मुआवजा और सांत्वना राशि की मांग
पांगरी बांध परियोजना के प्रभावितों का नेतृत्व कर रहे डॉ. रवि कुमार पटेल ने कहा कि यह आंदोलन सरकार को जगाने का प्रयास है। उन्होंने बताया कम मुआवजे में हमारा गुजारा नहीं हो सकता। ‘सिर पर खेती’ के जरिए हम यह संदेश दे रहे हैं कि हमें भूमि अधिग्रहण कानून की धारा 26 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार दोगुना मुआवजा चाहिए। साथ ही धारा 29 के तहत सांत्वना राशि (तोषण) भी मिलनी चाहिए। आंदोलन में बड़ी संख्या में किसान शामिल
इस अनोखे प्रदर्शन में किसान नंदू पटेल, मान्या भिलावेकर, राहुल राठौड़, माधौ नाटो, बद्री वास्कले, संजय चौसके सहित कई किसान मौजूद रहे। किसानों ने कहा कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे और आंदोलन जारी रहेगा। क्या है पांगरी बांध परियोजना
पांगरी बांध परियोजना मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले के खकनार क्षेत्र की एक मध्यम सिंचाई परियोजना है। परियोजना के चलते सैकड़ों परिवारों का भविष्य अधर में लटक गया है। किसानों का कहना है कि जब तक उचित मुआवजा और पुनर्वास नहीं मिलता, तब तक उनका संघर्ष यूं ही चलता रहेगा। सरकार के लिए चेतावनी भरा संदेश
‘सिर पर खेती’ आंदोलन के जरिए किसानों ने साफ कर दिया है कि वे अब सिर्फ ज्ञापन और धरने तक सीमित नहीं रहेंगे। यह अनोखा प्रदर्शन सरकार और प्रशासन के लिए एक कड़ा संदेश है कि अगर उनकी आवाज नहीं सुनी गई, तो आंदोलन और तेज होगा।


