नव वर्ष 2026 की तैयारी में शहर के सभी पर्यटन स्थलों में साज-सजावट हो रही है। अभी से ही पार्क-पहाड़, झरना और नदियों के किनारे पर्यटकों की भीड़ उमड़ने लगी है। लेकिन मोरहाबादी स्थित गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के बड़े भाई संगीतकार ज्योतिंद्रनाथ टैगोर की विरासत टैगोर हिल बदहाल होते जा रही है। प्रशासन की उदासीनता और असमाजिक तत्वों के जमावड़े की वजह से कभी सबसे खूबसूरत पर्यटन स्थल में शुमार टैगोर हिल बर्बाद हो रहा है। टैगोर हिल के मुख्य द्वार से सबसे ऊपर स्थित ब्रह्म मंदिर तक की सीढ़ी टूटी हुई है। उसके ऊपर लगे टाइल्स गायब हो गए हैं। बच्चे-बुजुर्ग का ऊपर पहुंचना मुश्किल है। चारों ओर पहाड़ और चट्टान के बीच इतनी गंदगी फैली है कि उससे दुर्गंध उठती है। लाइटें खराब हो गई हैं। चारों ओर डिस्पोजेबल ग्लास, सिगरेट के डब्बे और शराब की बोतलों के टूटे शीशे फैले हैं। ज्योतिंद्रनाथ टैगोर जिस कमरे में रहते थे, वह जुआरियों और नशेड़ियों का अड्डा बन गया है। दिन में कुछ युवक-युवती यहां पहुंचते हैं, लेकिन कई बार वे भी आपत्तिजनक स्थिति में पकड़े जाते हैं। हाईकोर्ट ने-संरक्षण का दिया था आदेश, नहीं हुआ काम झारखंड हाईकोर्ट ने प्राकृतिक सौंदर्य और आदिम संस्कृति संरक्षण संस्थान की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए टैगोर हिल को अतिक्रमणमुक्त करते हुए उसका संरक्षण करने का निर्देश दिया था। इसके बाद इसे स्टेट हेरिटेज का दर्जा दिया गया। जिला प्रशासन की पहल पर टैगोर हिल के सौंदर्यीकरण के लिए डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की गई। इसके तहत चारों ओर अतिक्रमण हटाकर बाउंड्रीवॉल करनी थी, सीढ़ी का निर्माण, हरियाली और लाइटिंग का काम कराना था, लेकिन कोई काम नहीं हुआ। राष्ट्रीय धरोहर के लिए भेजी गई थी रिपोर्ट वर्ष 1908 में ज्योतिंद्रनाथ टैगोर योग-ध्यान के लिए रांची आए थे। वर्ष 1910 में उन्होंने टैगोर हिल के सबसे ऊपर ब्रह्म मंदिर की स्थापना की थी। यहीं रहकर उन्होंने संगीत का लेखन भी किया था। 1925 में इसी परिसर में उनका निधन हुआ था। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद एएसआई रांची सर्किल ने दिल्ली मुख्यालय को टैगोर हिल की रिपोर्ट भेजी थी। इसमें 113 साल पुराने ब्रह्म मंदिर को राष्ट्रीय धरोहर बनाए जाने की अनुशंसा की गई थी, लेकिन इसकी घोषणा नहीं हुई। नहीं दिया ध्यान तो और बिगड़ जाएगी स्थिति : टैगोर हिल को संरक्षित करने के लिए काफी प्रयास किया गया। हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। कोर्ट ने टैगोर हिल को संरक्षित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद चार करोड़ की डीपीआर तैयार कराई गई। कुछ काम हुआ लेकिन अतिक्रमण नहीं हटा। अब असमाजिक तत्वों का अड्डा बन गया है। चारों ओर अतिक्रमण बढ़ते जा रहा है। इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो स्थिति और अधिक खराब हो जाएगी।


