नगर निगम ने अमृत योजना के दूसरे चरण (अमृत 2.0) के तहत जल आपूर्ति व्यवस्था सुधारने के लिए तीन नए टेंडर जारी किए हैं। करीब 1300 करोड़ रुपए की लागत वाले ये टेंडर जनवरी के पहले सप्ताह में खोले जाएंगे। इस चरण में शहर को सबसे बड़ी राहत 1 लाख 45 हजार नए नल कनेक्शन के रूप में मिलने जा रही है। इससे अब तक नर्मदा जल से वंचित इलाकों को सीधा लाभ मिलेगा। निगम इससे पहले चार टेंडर जारी कर चुका था, लेकिन तकनीकी आपत्तियों और ऊंची दरों के कारण तीन टेंडर निरस्त करने पड़े। एक टेंडर ब्लैकलिस्टेड कंपनी को मिलने के बाद रद्द किया गया। इसके बाद निगम ने पूरी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करते हुए तीन नए टेंडर जारी किए हैं। इस योजना के लिए निगम बैंक से लोन ले रहा है और कुल खर्च करीब 2 हजार करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। निगम के मुताबिक अमृत 2.0 पूरा होने के बाद शहर के हर घर तक नर्मदा का पानी पहुंचाने का लक्ष्य है। फिलहाल इंदौर की करीब 20 प्रतिशत आबादी तक नर्मदा जल आपूर्ति नहीं पहुंच पा रही है। जल कार्य विभाग प्रभारी और एमआईसी सदस्य अभिषेक शर्मा ने बताया कि तीन टेंडर दोबारा किए गए हैं। जनवरी के पहले सप्ताह में टेंडर खोले जाएंगे। इसके लिए नर्मदा नदी से 400 एमएलडी अतिरिक्त पानी लेने की सरकारी मंजूरी मिल चुकी है। इनमें नई टंकियों के साथ पुरानी टंकियों के मरम्मत का काम भी शामिल है। करीब 800 किमी वितरण लाइनें डाली जाएंगी। अमृत सेकंड फेज लीकेज में बेशकीमती पानी बह रहा जलूद से इंदौर तक आने वाली पुरानी पाइपलाइनों में 10 से 15 प्रतिशत तक पानी लीकेज में बह जाता है। भारी निवेश की जरूरत के चलते यह काम वर्षों से अटका रहा। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इंदौर देश का एकमात्र ऐसा शहर है जो सबसे महंगा पानी पीता है। हर साल 300 से 350 करोड़ का खर्च सिर्फ पानी को इंदौर तक लाने पर होने वाले बिजली के खर्च पर आता है। नर्मदा के पहले, दूसरे और तीसरे चरण के तहत 400 एमएलडी से ज्यादा पानी लिया जाता है। अब अमृत 2.0 के तहत पुरानी लाइनों के समानांतर नई पाइपलाइन बिछाई जाएंगी, जिससे लीकेज और गंदे पानी की शिकायतें खत्म करने का दावा किया जा रहा है।


