शहर के चक्रतीर्थ मुक्तिधाम पर न सिर्फ उज्जैन, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी अंतिम संस्कार के लिए लोग पहुंचते हैं। यहां शेड टूटा हुआ था। शव दाह के ओटले जर्जर थे। बैठक की सही व्यवस्था भी नहीं थी। इलेक्ट्रिक शवदाह भट्टियां दो साल से खराब थीं। नगर निगम इसे आदर्श मुक्तिधाम के रूप में विकसित कर रहा है। डेढ़ साल में चक्रतीर्थ पर अब तक करीब एक करोड़ रुपए के कार्य पूरे हो चुके हैं। मुक्तिधाम परिसर में 76 लाख से 80 मीटर लंबा स्पेशल डोम टेंसाइल फैब्रिक शेड लगवाया है। 25 लाख रुपए खर्च कर पुराने पतरे के शेड हटाकर नए शेड लगाए गए। बैठने के लिए पर्याप्त कुर्सियां और बेंच, पूरे परिसर में रंगाई-पुताई, टॉयलेट निर्माण, ओटलों का निर्माण, उनकी रंगाई-पुताई और मार्किंग जैसे कई जरूरी कार्य कराए गए हैं। 60 फीट ऊंचा सुदर्शन चक्र स्टैच्यू
चक्रतीर्थ मुक्तिधाम में अब देश का पहला 60 फीट ऊंचा सुदर्शन चक्र स्टैच्यू स्थापित करने की तैयारी है। महापौर मुकेश टटवाल ने बताया इसके लिए 80 लाख रुपए स्वीकृत हाे चुके हैं। ड्राइंग-डिजाइन तैयार है और जल्द ही कार्य शुरू होगा। यह स्टैच्यू शिप्रा नदी के बड़े पुल, दत्त अखाड़ा, कार्तिक मेला प्रांगण और बड़नगर रोड से भी नजर आएगा। ये प्रमुख बदलाव : ⦁ परिसर की रंगाई-पुताई व सौंदर्यीकरण किया। ⦁ पर्यावरण हितैषी चार नए पीएनजी गैस आधारित शवदाह शुरू किए हैं। इनकी सेवा निगम द्वारा मात्र 1 रुपए में दी जा रही है। ⦁ टेंसाइल शेड लगाया, ताकि बारिश-धूप में परिजन सुरक्षित बैठ सकें। करीब 50 बेंच लगाई, शोकसभा हॉल का नवीनीकरण किया। ⦁ 18 शवदाह ओटलों का सुधार कर यहां नए शेड लगाए। अतिरिक्त सुलभ गृह भी बनाते हुए सफाई व्यवस्था पर सख्ती कर दी गई।


