सुपर कॉरिडोर यानी बगैर रुके 11 किमी का सफर। जिस मूल उद्देश्य के साथ सुपर कॉरिडोर का निर्माण किया गया था, वह अब बदल गया है। लगातार हो रहे हादसों के बाद सुपर कॉरिडोर की स्पीड पर अब ब्रेक लगाने की तैयारी है। इसी कड़ी में टीसीएस चौराहे पर स्पीड ब्रेकर बना दिया है। अब अलग-अलग चौराहों पर सिग्नल के साथ स्पीड ब्रेकर बनाने की योजना है। एक साल में यहां 10 से अधिक बड़ी दुर्घटनाएं हुई हैं, जिसमें 5 मौत के साथ कई लोग गंभीर घायल हुए हैं। इसे देखते हुए सुरक्षा उपाय करना जरूरी हो गया है। वहीं, कॉरिडोर पर एलिवेटेड मेट्रो ट्रैक का निर्माण होने, आईटी कंपनियों के दफ्तर और आवासीय बसाहट होने से यहां ट्रैफिक दबाव भी काफी बढ़ गया है। पिछले दिनों टीसीएस व अन्य ने प्रशासन व आईडीए को पत्र लिखकर कहा था, ट्रैफिक सुरक्षा उपाय पर्याप्त नहीं हैं। वाहनों की स्पीड व ट्रैफिक कंट्रोल जरूरी है। इन सभी के आधार पर आईडीए व ट्रैफिक पुलिस के अफसरों ने निरीक्षण कर सुरक्षा उपाय करने का निर्णय लिया और सुधार शुरू किए हैं। सुपर कॉरिडोर सुरक्षा मानकों की कमी : वार्निंग साइन, लेन मार्किंग और रोड इंडिकेटर नहीं, क्रॉसिंग में परेशानी बड़े हादसे… इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स ने भी गंवाई जान इसलिए सुरक्षा उपाय जरूरी


