लघु उद्योग भारती महिला इकाई:महिला उद्यमियो ने लोकल उत्पादो को ब्रांड बनाया, खुद आत्मनिर्भर बनीं, जरूरतमंद महिलाओं को रोजगार दिया

लघु उद्योग भारती महिला इकाई। 25 सितंबर 1994 को स्थापित इस इकाई का उद्देश्य था कि देश के आज यह संगठन देशभर में 52 हजार से अधिक सदस्यों के साथ हर जिले में सक्रिय है। ब्यावर इकाई में 340 सक्रिय सदस्य उद्योगों के विकास में योगदान दे रहे हैं। स्वयंसिद्धा प्रदर्शनी और संगठन से मिले मार्गदर्शन ने अनेक महिलाओं को व्यवसाय, आत्मविश्वास और नेतृत्व की नई दिशा दी है। कोविड के बाद 22 अगस्त 2022 को महिला इकाई का गठन किया गया। महिलाओं ने तेल, मसाले, क्रेशर प्लांट, हर्बल क्रीम जैसे उत्पाद तैयार किए। लाेकल उत्पादों काे ब्रांड बनाकर आत्मनिर्भर बनीं। आज ब्यावर में 86 और देशभर में 1600 से अधिक महिलाएं इस अभियान से जुड़ आत्मनिर्भर बनी हैं। 1. डॉ. रीना राठौड़ :वर्ष 2006 में डॉ. रीना राठौड़ ने पति के साथ मिलकर मेवाड़ा हाईटेक की स्थापना की जहां क्रेशर प्लांट का निर्माण होता है। वर्ष 2002 में 35 लाख रुपए के शुरुआती टर्नओवर से यह समूह 2015 तक 50 करोड़ और आज करीब 100 करोड़ रुपए के टर्नओवर तक पहुंच चुका है। समूह में करीब 500 कर्मचारी हैं। उन्होंने महिलाओं को स्किल डेवलपमेंट, स्वरोजगार व सेवा कार्यों को आगे बढ़ाया। 2. अर्पिता शर्मा : कोविड के बाद अर्पिता शर्मा ने शत-शोधित धृत (हर्बल क्रीम) बनाना सीखा। लघु उद्योग भारती से जुड़ी तो बादाम तेल को उत्पाद शृंखला में जोड़ते हुए अपने ब्रांड एयूएसएम (अर्पिता, उर्मिला, शशि, मनीषा) की शुरुआत की। इनका आज 40 करोड़ रुपए का टर्नओवर है जिनसे आज 110 कर्मचारी जुड़े हैं। 3. संध्या अग्रवाल : संध्या अग्रवाल ने जीबीआर मसालों में प्रोडक्शन, पैकिंग और गुणवत्ता नियंत्रण की जिम्मेदारी संभाली, अपने 12 वर्कर की टीम की बदौलत आज उनका सालाना 3 करोड़ का टर्नओवर है। 4. नीतू शाह : स्वयंसिद्धा प्रदर्शनी में महिला उद्यमियों की आत्मनिर्भरता से प्रेरित होकर नीतू शाह ने लघु उद्योग भारती की महिला इकाई से जुड़ने का निर्णय लिया। आज वे अपने व्यवसाय से शुद्ध एवं घरेलू मिठाइयां तैयार कर रही हैं। आज उनका टर्नओवर 1 करोड़ को पार कर चुका है।

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