संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद जिया उर्रहमान बर्क ने बांग्लादेश के मौजूदा हालातों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया (एक्स और फेसबुक) पर भारत में हुई मॉब लिंचिंग की घटनाओं पर भी सवाल उठाए। यह पोस्ट उन्होंने रविवार रात को साझा की। सांसद बर्क ने अपनी पोस्ट में लिखा कि बांग्लादेश आज अपनी दास्तान खुद लिख रहा है, जहाँ का भविष्य अंधेरे में दिखता है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी से जूझते कई युवा हिंसा में लिप्त हैं, जो किसी भी समाज के लिए खतरनाक संकेत है। उन्होंने आगे कहा कि सिर्फ बांग्लादेश को दोष देना पर्याप्त नहीं है, हमें अपने गिरेबान में झांकना भी उतना ही जरूरी है। बर्क ने अपनी पोस्ट में कहा कि जब सियासत नफरत के नाम पर होती है तो उसका यही नतीजा निकलता है। सांसद बर्क ने दावा किया कि भारत में अब तक 300 से ज़्यादा लिंचिंग की घटनाएं मज़हब और जाति के नाम पर हो चुकी हैं। छत्तीसगढ़ के दलित प्रवासी मजदूर राम नारायण का जिक्र किया, जिनकी केरल के पलक्कड़ जिले में भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। सांसद ने सवाल उठाया कि क्या उनकी जान की कोई कीमत नहीं है, जो मीडिया इस घटना पर खामोश है? उन्होंने इसे नफ़रत की राजनीति नहीं, बल्कि इंसानियत की हार बताया।
अख़लाक़ की हत्या के मामले पर सांसद बर्क ने कहा कि हालात और भी शर्मनाक रहे। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने उनके खिलाफ केस वापस लेने के लिए कोर्ट में याचिका दाखिल की थी, लेकिन न्यायपालिका ने उस याचिका को ख़ारिज कर दिया। उन्होंने इस फैसले को इंसाफ की उम्मीद को जिंदा रखने वाला बताया और कहा कि ऐसे दोषियों के लिए कोई नरमी नहीं होनी चाहिए, उन्हें फाँसी मिलनी चाहिए। सांसद बर्क ने अंत में कहा कि अगर हम सच में एक सभ्य समाज चाहते हैं, तो नफ़रत के हर रूप के खिलाफ खड़ा होना होगा, चाहे वह सीमा के उस पार हो या हमारे अपने घर में।


